1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. मेरा ब्लॉग
  4. RSS chief Mohan Bhagwat called Dr. Hedgewar's psychology a subject of research.
Last Modified: सोमवार, 12 जनवरी 2026 (18:05 IST)

डॉ. हेडगेवार की साइकोलॉजी को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताया शोध का विषय

RSS chief Mohan Bhagwat
विगत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  100 वर्षों  के गौरवशाली ऐतिहासिक सफर की सजीव झांकी से लोगों का साक्षात्कार कराने के उद्देश्य से एक फिल्म के निर्माण की घोषणा की गई । शतक नाम से बनने जा रही इस रोमांचक फिल्म के दो सुमधुर गीतों "भारत मां के बच्चे" और "भगवा है मेरी पहचान" का लोकार्पण सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा किया गया। इस फिल्म के निर्माता वीर कपूर और सह-निर्माता आशीष तिवारी हैं जबकि फिल्म का निर्देशन आशीष मल्ल कर रहे  हैं। शतक फिल्म के इन सुमधुर गीतों को सुप्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह ने आवाज दी है।

संघ के शताब्दी वर्ष में प्रदर्शित होने जा रही इस  दर्शनीय फिल्म में  संघ के स्थापना काल से लेकर विगत 100 वर्षों की संघ की गौरवशाली यात्रा के महत्व पूर्ण पड़ावों और राष्ट्र व समाज निर्माण में संघ के महत्वपूर्ण योगदान को चित्रित किया जा रहा है। शतक फिल्म के गरिमामय गीत लोकार्पण समारोह में फिल्म के निर्माता वीर कपूर, निर्देशक आशीष मल्ल, गायक सुखविंदर सिंह के साथ ही संग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर संघ प्रमुख ने कहा कि ज्यों ज्यों संघ नये रूप में विकसित होता है तो लोगों को लगता है कि संघ बदल रहा है लेकिन संघ बदल नहीं रहा है बल्कि संघ नये रूप में प्रकट हो रहा है। जैसे एक बीज से पहले अंकुर निकलता है फिर वह बड़ा होकर फल फूल से लदा वृक्ष बन जाता है । यद्यपि अंकुर और वृक्ष दोनों अलग रूप हैं परन्तु यथार्थ में दोनों ही बीज के समानार्थी हैं। यही बात संघ के बारे में भी कहीं जा सकती है। संघ विकसित होने के साथ बदल नहीं रहा है बल्कि नये रूप में सामने आ रहा है।
         
संघ प्रमुख ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके संस्थापक डॉ हेडगेवार को समानार्थी बताते हुए कहा कि डा हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। उनके मन में बचपन से ही यह बात घर कर चुकी थी कि हम परतंत्र हैं और हमें स्वतंत्र होना है । उन्होंने स्कूली शिक्षा के दौरान चौथी कक्षा में  महारानी विक्टोरिया के स्वागत समारोह में दी गई मिठाई फेंक दी थी। संघ प्रमुख ने डा हेडगेवार के प्रेरक व्यक्तित्व की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब डा साहब मात्र 11 वर्ष के थे तब एक घंटे के अंतराल से ही उनके माता-पिता,दोनों का प्लेग की बीमारी से निधन हो गया था। इतनी कम उम्र में सिर से माता पिता का साया उठ जाना किसी भी बालक को उदासीन और विचलित कर सकता है परन्तु डा हेडगेवार ने इस महान आघात का अपने मन और स्वभाव पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने दिया बल्कि अपना सर्वस्व देश के लिए समर्पित करने का मन बना लिया।

संघ प्रमुख ने कहा कि डा हेडगेवार मजबूत और स्वस्थ मन के धनी थे उनके  अंदर बड़े से बड़ा आघात सहन करने की क्षमता और साहस मौजूद था। उनका विरोध करने वाले लोगों में उनके मित्र भी शामिल थे परन्तु  उनके पास सब प्रकार के लोगों को जोड़ने का स्वस्थ मन था। यही कारण था कि इतनी कम उम्र में भी माता पिता के निधन का आघात उनके मन में विकृति और उदासीनता नहीं ला सका । संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपनी इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि डा हेडगेवार  की इस साइकोलॉजी को अध्ययन और शोध का विषय बनाया जा सकता है।
(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)
ये भी पढ़ें
मकर संक्रांति और पतंगबाजी पर बेहतरीन कविता