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गाय और शिक्षक की तुलना...

मनोज लिमये
भारतीय शिक्षा प्रणाली से गुजरने वाला शायद ही ऐसा कोई विद्यार्थी रहा हो, जिसने शालेय शिक्षा के दौरान पवित्र भाव मन में लाकर कभी न कभी गाय पर निबंध ना लिखा हो। दीपावली और गाय, यह ऐसे सर्वप्रिय विषय थे, जिन पर सर्वाधिक निबंध लिखे गए होंगे।


यदि यह शर्त होती, कि लिखे अनुसार गाय को न सिर्फ माता मानना होगा वरन निबंध लिखने वाले विधार्थी को गाय को घास का गट्ठर भी खिलाना होगा, तो शायद देश में एक भी गाय दुबली या कमजोर नहीं होती। शिक्षा प्रणाली तथा इसके आधारभूत ढांचे में तेजी से हो रहे परिवर्तन के बावजूद अपेक्षाजनक परिणामों की प्राप्ति नहीं हो पाने का प्रमुख कारण विषयवस्तु में बदलाव नहीं किया जाना है।
 
21वीं सदी के होनहारों को परंपरागत विषयों में बांधे रखना एक प्रकार से इनकी कल्पनाशीलता पर लगाम लगाना है। आज के विद्यार्थियों को गाय पर सूखा हुआ निबंध लिखने को देना, उनका ही नहीं गाय का भी सीधे-सीधे अपमान है। निजी विद्यालयों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचना अकादमिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से लाभप्रद काज होता है, सो इसी का अनुसरण करते हुए मुझे एक निजी विद्यालय के हाई स्कूल के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का निमंत्रण ससम्मान प्राप्त हुआ। 
 
पत्र में मानदेय वाली बात मोटे अक्षरों में अंकित थी, सो मना करने का कोई प्रश्न ही नहीं था। निजी विद्यालय के हिंदी के पर्चे में प्रश्न पुछा गया था कि गाय और शिक्षक विषय पर एक तुलनात्मक निबंध कम से कम बिंदुओं में लिखिए। विद्यार्थियों द्वारा उक्त विषय में रेखांकित करने योग्य जो विविध बिंदु लिखे गए थे, वे आपके समक्ष यथावत प्रस्तुत हैं - 
 
1 - गाय तथा शिक्षक दोनों भारतीय समाज में पूजनीय हैं तथा विशेष स्थान रखते हैं।
2 - गाय सनातन रूप से शाकाहारी है तथा घास खाती है और शिक्षकों के वेतनमानों में चल रही विसंगतियों के चलते वो समय दूर नहीं जब शिक्षकों को भी घास खा कर ही गुजारा करना पड़े।
3 - गाय भोजन उपरांत जुगाली करती है और शिक्षक विषयवस्तु का भोजन कर छात्रों के समक्ष अपने ज्ञान की बौद्धिक जुगाली करते रहते हैं।
4 -  गाय को हरा चारा बेहद पसंद होता है तथा हरा चारा इसकी दुधारू क्षमता में वृद्धि करता है, जबकि शिक्षक को हरे चारे के रूप में समय-समय पर इन्क्रीमेंट, डी.ए., एरियर दिया जाता है, जिसके फलस्वरूप ये स्वफूर्त होकर अपनी दुधारू क्षमता में अभिवृद्धि करते रहते हैं।
 
5 - घरों में पलने वाली गाय आमतौर पर शांत स्वभाव की होती हैं किंतु सब्जी मंडी में विचरण करने वाली गायों को लड़ाकू किस्म का माना जाता है। ठीक इसी प्रकार शालाओं में पठन कार्य में रत शिक्षक शांत स्वभाव के माने जाते हैं, जबकि यूनियनबाजी में लिप्त शिक्षकों को अनुशासनहीन की श्रेणी में रखा जाता है तथा ये बिना सिंग के शासन से लड़ाई करते रहते हैं।
 
6 - गाय एक बहुउद्देशीय उपयोगी प्राणी है जिससे दूध, मलाई, मक्खन, घी के अलावा गोबर भी प्राप्त होता है। इसी प्रकार शासन की मेहर से शिक्षक भी एक बहुउद्देशीय प्राणी है जिससे चुनाव, जनगणना, मध्यान भोजन और पशु गणना जैसे अनगिनत कार्य करवाए जाते हैं।
 
7 - जिस प्रकार किसी बच्चे को सींग मार देने या सार्वजनिक स्थान पर हुड़दंग मचाने वाली गायों को दंड दिया जाता है , उसी तर्ज पर शिक्षक यदि मध्यान भोजन जैसे महत्त्व पूर्ण कार्य में कोताही बरतें तो इन्हें निलंबन का दंड देने का प्रावधान किया गया है।
 
8 - गाय को अपने मालिक से या अन्य किसी वजह से कष्ट होता है तो ये मूक प्राणी जोर-जोर से रम्भाकर दुख प्रगट करती है, इसी प्रकार शिक्षक कष्ट में आने पर मुख्यमंत्री या विधान सभा के समक्ष खड़े हो माइक पर शोर-शराबा करते हैं।
 
उपसंहार ...शिक्षक शासन की एक दुधारू गाय है।
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