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फैन और प्रशंसक

राकेश शर्मा
इन दोनों में क्या फर्क है? सामान्य तौर पर इन दोनों शब्दों का एक ही तात्पर्य निकाला जाता  है, पर काफी विचार करने के पश्चात अपनी बुद्धि और विचारों की पराकाष्ठा के हिसाब से जो  समझ पाया हूं, वो यह कि कोई सेलिब्रिटी जिसके फैन होते हैं, वो उनको हाथ हिला दे तो उसके  फैन खुश हो जाते हैं। 


 
वो छींक भी करे तो उसके फैन के लिए वो उसकी अदा बन जाती है। वो  फटी पैंट पहन के घूमे तो वह फैन को दीवाना बना जाती। उसकी कोई भी ऊटपटांग हरकत पर  सब खुश होकर ताली पीटकर दीवाने हुए जाते हैं फिर चाहे वो रीयल हो या नौटंकी। फैन तो  बस, अपने हीरो के सभी क्रिया-कलापों पर खुश होते हैं।
 
ऐसा मैं इसलिए कह सकता हूं कि आजकल टीवी पर एक प्रोग्राम आता है 'यारों की बारात'।  अब फैन तो फैन है। हीरो या सेलिब्रिटी के पास आने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते  हैं, पर ये सेलिब्रिटी लोग किस तरह उनका फूहड़ता के साथ उपहास बनाते हैं, यह देखने में  झुंझलाहट होती है, पर आखिर फैन हैं और उन्हें यह भी खुशी देता है। आखिर फैन हैं घूमते ही  रहना है। अगर सेलिब्रिटी दिन को रात कह दे तो फैन भी खुशी में झूमते हुए बिना देर लगाए  दिन को रात बता देगा। इनके होने से सेलिब्रिटी को कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
 
अब बात प्रशंसक की। मेरी समझ से प्रशंसक आपके अच्छे काम की तारीफ करेंगे तो आपकी  गलती को और ज्यादा जोर से शोर मचाकर आपको दिखाएंगे। प्रशंसकों की अपनी एक अलग ही  अदा होती है। वो एक लाइन लिखकर ही प्रशंसा कर देते हैं और अगर कहीं कोई गलती हुई तो  पेज भर-भर के ज्ञान दे डालते हैं। 
 
वो किसी सेलिब्रिटी या राजनेता के किसी भी कार्य का अंधानुकरण नहीं कर सकते, क्योंकि वो  फैन नहीं हैं। वो अपना मस्तिष्क अपने पास रखते हैं, कहीं गिरवी नहीं रख देते। वो प्रशंसा के  साथ आलोचना और विरोध करना भी जानते हैं फिर चाहे वो कोई भी सेलिब्रिटी हो या राजनेता  हो। प्रशंसक एक आलोचक भी हो सकता है 
 
एक पुरानी कहानी है जिसमें एक राजा नंगा होकर पूरे राज्य में घूमता रहा और राजा के डर से  उसके दरबारी मंत्री व यहां तक कि राज्य के सभी लोग यह कहते रहे कि बहुत सुंदर पोशाक  राजा ने पहनी हुई है। बहुत देर तक घूमने के पश्चात फिर एक बालक ने उस राजा को एहसास  कराया कि वो नंगा ही घूम रहा है। राजा की हां में हां मिलाने वाले मंत्री नहीं होने चाहिए।
 
शायद सेलिब्रिटी भी इस रहस्य को जानते हों कि कौन उसका फैन है और कौन उसका प्रशंसक  तो फैन मत बनिए, अंधानुकरण मत करिए। प्रशंसक बनिए। सही को सही और गलत को गलत  कहिए। 
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