here

Hanuman Chalisa

व्यंग्य रचना : जब मैं जज बना

मनोज लिमये
शाम के वक़्त दफ़्तर से निकलने की जुगत में ही था कि एक शख्स का मेरे कक्ष में प्रवेश हुआ। उन्होंने शिकायती लहजे में कहा 'दो-तीन दफा फोन लगाया आपको किन्तु आपने उठाया ही नहीं'! मैंने कहा'जी दफ्तर में आज काम कुछ ज़्यादा था इसलिए फोन नहीं उठा सका बताइए क्या सेवा करूं आपकी? उन्होंने कहा 'जी आप वो ही लेखक महोदय हैं न जिन्हें मैं समाचार पत्रों में पढ़ता आया हूं 'मैंने नई नवेली दुल्हन की भांति शर्माते हुए कहा'जी आप जैसे पाठक हैं तो हमें लेखक भी मान लिया जाता है"
मेरे प्रतिउत्तर पश्चात उनकी भाव भंगिमा ऐसी हो गई मानो मैंने 'एक राजा दूसरे राजा से जैसा व्यवहार करता है' टाइप की कोई पौरसनुमा बात उनसे कह दी हो। वे बोले 'दरअसल मैं अपने समाज का सचिव हूं और हम बेस्ट कपल प्रतियोगिता आयोजन हेतु आपको जज के रूप में आमंत्रित करना चाहते हैं "मैंने विस्मय वाले भाव चेहरे पर लाते हुए कहा 'जी बेस्ट कपल जैसे कार्यक्रमों में एक लेखक का क्या काम आप तो किसी मनोचिकित्सक या समाज विशेषज्ञ को बुला लें' वे बोले 'समाज विशेषज्ञ तो समझ आता है लेकिन मनोचिकित्सक का इस प्रतियोगिता से क्या सम्बन्ध? 
 
मैंने कहा 'कपल बेस्ट है या नहीं यह एक पृथक मुद्दा है किन्तु जो वर्षों से साथ रह रहे हों एक दूसरे को अनवरत झेल रहे हों और बेस्ट कपल प्रतियोगिता के प्रतिभागी भी हों तो मनोचिकत्सक ही तो उनकी मनोदशा समझ सकेगा'
वे मेरे प्रति निराशा के भावयुक्त मुखारबिंद से बोले'जी आप थोड़ा-मोड़ा व्यंग्य कर लेते हैं इसका मतलब यह नहीं कि हमारी प्रतियोगिता पर सवालिया निशान लगाएं' उनके तल्ख़ लहजे से मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। मैंने माहौल को हल्का करने के सोद्देश्य से कहा 'मैं तो इसलिए बोल रहा था कि टीवी पर बेस्ट कपल को होस्ट करने वाला कपल खुद तलाक ले रहा है खैर जज के रूप में मुझसे क्या अपेक्षाएं हैं जनाब"वे प्रतियोगिता का पर्चा मेरे समक्ष रखते हुए बोले 'जी प्रतियोगियों से चंद पारिवारिक या सामान्य ज्ञान के प्रश्न कर उनका प्रदर्शन आंकना है आपको और हां आपको कुछ मानदेय भी देय होगा संस्था की और से ' 
 
मानदेय वाली प्रेरणादायी बात सुन मैंने उनका आग्रह मान लिया। जज बनने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था सो टी वी पर आने वाले रियलटी शो में प्रतिभागियों से अधिक जजों पर ध्यान केंद्रित करने लगा। जीतेन्द्र अभिनीत जस्टिस चौधरी भी 2 दफा देख डाली। प्रतियोगिता के दिन नियत समय पर स्थल पर पंहुच गया। अपना ज्ञान बढ़ाने हेतु संस्था के विषय में जानकारी मांगी तो संस्था की एक पदाधिकारी संस्था की एक मोटी मार्गदर्शिका मुझे थमा गई। कुछ समय पश्चात प्रतियोगिता आरम्भ हुई। सामान्य ज्ञान की पुस्तक से कंठस्थ किए तमाम प्रश्न मैंने प्रतियोगियों पर दाग डाले। दोपहर को लंच सम्बन्धी उद्घोषणा ने मेरे चेहरे की आभा बढ़ा दी।
 
भोजन उपरान्त आगंतुक जोड़े अपना परिचय दे कर स्पर्धा जीतने हेतु प्रतिबद्ध दिखे। शनेः-शनेः मैं सामान्य व्यक्ति से जज होने लगा था। स्पर्धा समाप्ति के बाद पदाधिकारियों ने सम्मान में सब कुछ दिया गया बस जिस लिफ़ाफ़े के मोह में अपन ने आमंत्रण स्वीकारा था वो नदारद था।

दुःखी मन से मैंं घर पंहुचा और मन ही मन निश्चय किया कि भविष्य में भले ही मुजरिम बन जाऊंगा पर जज कदापि नहीं बनूंगा।
 
 
 

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के बारे में 10 रोचक तथ्य

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

अगला लेख