biodatamaker
✕

तेरे आँगन में...

Written By WD
Updated: बुधवार, 9 जुलाई 2014 (20:02 IST)
- दिलशाद ज़ाफरी
ND

जब मैं तेरे आँगन में
एक फूल की माँनिंद खिला
तू देख के मुझको जीती थी
मैरे आँसू पीती थी
माँ ओ माँ!
अक्सर डर कर मैं छुप जाता था
तेरे आँचल में
ख़ुशियों के सारे रंग मैं पाता था
तेरे आँचल में
मेरे लिए तू ही सारी दुनिया थी
तेरी झोली में ही तो मेरी सारी ख़ुशियाँ थी
आज !
मैं उलझा हूँ जीवन के संघर्षों में
पर इस तपती दोपहरी में भी
माँ !
तेरी कोई दुआ
बादल बनकर मेरी रूह से टकराती है
और
आज भी
सारी फ़िक्रों के बीच
मुझे ये ख़ुशियाँ दे जाती है
माँ ओ माँ !

Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?