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स्वदेशी का अर्थ देशज होना है

मंगलवार,अक्टूबर 27, 2020
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कोई मीडिया प्रतिष्ठान चीन के साथ सीमा पर वर्तमान में चल रहे तनावपूर्ण सम्बन्धों के दौरान अगर ऐसी खबर चला दे कि सैनिकों के बीच सेनाध्यक्ष के निर्णयों के प्रति (कथित तौर पर) ‘विद्रोह’ पनप रहा है तो रक्षा मंत्रालय और सरकार को क्या करना चाहिए? भारतीय ...
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किताब की शानदार कामयाबी को देखते हुए मंजुल प्रकाशन ने ‍हिंदी और मराठी भाषा में भी इसका प्रकाशन किया है। जबिक इसके गुजराती, तेलुगू और मलयालम संस्‍करण भी जल्‍दी ही आने वाले हैं।
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दरअसल हाल ही में नि‍र्मला सीतारमण ने कहा है कि ब‍िहार में वैक्‍सीन का न‍िशुल्‍क वितरण किया जाएगा। ठीक इसके बाद मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने भी अपने राज्‍य में गरीबों को पहले वैक्‍सीन देने की घोषणा कर डाली।
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आजकल देश और समाज में चहूंओर सोशल मीडिया का चलन बढ़ता ही जा रहा है। केवल युवा ही नहीं हर वर्ग में इसकी गहरी पैठ स्पष्ट दिखाई दे रही है। देश व समाज में सोशल मीडिया का प्रयोग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रकार से बखूबी किया जा रहा है। अब यह उपयोग ...
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जब एक महामारी के कारण देश और दुनिया इतिहास की सबसे संकटपूर्ण स्थिति में फंसे हों और ऐसे समय समाज का कोई तबका अलग और उलट ढंग से पेश आए तो यह किसी भी सभ्य समाज और मजबूत सरकार के लिए नजरअंदाज करने वाली घटना नहीं है।
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रंग-बिरंगे कपड़ों के साथ मैचिंग मास्क को ‘फैशन असेसरीज’ की तरह उपयोग करें। भीड़-भड़ाके से दूर अपने प्रियों के साथ उत्सव का आनंद लें। यही अवसर है जब मां की दिल से आराधना बिना किसी चोंचले के हम कर रहे हैं। साधना की राह में सबसे बड़ी बाधा विश्वास की होती ...
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वे जनप्रतिनिधि बनने के बाद अपनी आय के माध्यम ढूंढ़ते हैं कि कैसे और किस प्रकार से, कहां-कहां से धन की वर्षा होती है वे अपने इन अभियानों में जुटकर दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी गति से आर्थिक वारे-न्यारे करने के लिए जुट जाते हैं।
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सर्वकालिक महान विद्वान प्रकांड पंडित भविष्यवेत्ता महान वैज्ञानिक तीनों लोकों में मेरे जैसा वीर कोई नहीं था।
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क्या हुआ जो बंधन है, क्या हुआ जो घर से निकल नहीं सकते, क्या हुआ जो आवाजों का शोर नहीं है, हंसी, खिलखिलाहटों का दौर नहीं है.... हमारे मन के आंगन के उत्सव तो हमारे हाथ में हैं ना... क्या हुआ जो रंगबिरंगे चौराहे नहीं है, घर का कच्चा-पक्का आंगन तो है ...
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मोदी चीन पर भी कुछ नहीं बोले, देश के किसी वर्ग के लिए कोई आर्थि‍क पै‍केज की घोषणा नहीं की। अपनी शख्‍स‍ियत के मुताबि‍क चौंकाने वाला कोई फैसला नहीं सुनाया।
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खेती के अपशिष्ट से बनने वाली यह प्लाई आज बाजार में उपलब्‍ध सभी प्लाई से न केवल चार गुना ज्यादा मजबूत होगी बल्कि सस्ती भी. पराली से लेमिनेटेड और गैर लेमिनेटेड दोनों तरह की प्लाई बनेंगी जिसकी कीमत गुणवत्ता के हिसाब से 26 से 46 रुपए वर्गफीट तक होगी।
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देवी क्या है, यह नवरात्रि में एकांत में बैठे किेसी साधक से पूछिए... ध्यान के दौरान होने वाले उसके साथ होने वाले चमत्कार को जानिए... उस शक्ति और विराट स्वरूपा के अंश को महसूस कीजिए...
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मुझे बड़ा अजीब ही समझे, मुझे लेख लिखना है फूलों की पंखुडियों पर, परंतु लिखूं तो लिखूं कैसे और लिखने के लिए लाने है, पखुंडियों जैसे कोमल शब्द।
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बात यहां से शुरू करते हैं : मौके का फायदा उठाकर अपना प्रोफाइल कैसे बड़ा किया जाए यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से बेहतर और कोई नहीं समझता।
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गुजरात में बगैर गरबे की नवरात्रि न कभी देखी न सुनी..इस वर्ष माँ चाचर चौक में नही पधारी..शहर सूना.. गरबा ग्राउंड सूने..रातें सूनी..
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हम पिछले अनेक चुनावों में देखते आ रहे हैं कि चुनावों की घोषणा के पहले तक तो सभी दल विकास और जनता की आवाज़ बनने का दावा करते हैं। लेकिन घोषणा होने के बाद ज्यों-ज्यों प्रचार रफ़्तार पकड़ता है त्यों-त्यों असली मुद्दे ग़ायब होते जाते हैं। व्यक्तिगत ...
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शेखर को पीछे से वाहन आने की आवाज सुनाई दी, उसका अंदाजा भी सही निकला जो पुलिस का ही वाहन था। शेखर ने उन्हें रोका और सम्पूर्ण घटनाक्रम फिर से बतलाया उस वाहन में करीब एक दर्जन पुलिस के जवान थे।
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यह राजस्‍थान के एक सामुहिक दुष्‍कर्म मामले की घटना के सच का सिर्फ एक हिस्‍सा है। ऐसा भारत के कई शहरों और दूर-दराज के गांवों में अक्‍सर होता है जिसकी खबर मीडि‍या को कभी नहीं लगती है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जब महाराष्ट्र से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका से अपने साक्षात्कार में कहा होगा कि पूरी दुनिया में भारत के मुस्लिम ही सबसे ज़्यादा संतुष्ट हैं, तब वे निश्चित ही कल्पना नहीं कर पाए होंगे कि एक राष्ट्रभक्त ...
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