भोगी पंडिगाई पर किस देवता की होती है पूजा?
Bhogi Pandigai 2026: भोगी पंडिगाई, जो दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पोंगल और मकर संक्रांति उत्सव के पहले दिन मनाया जाता है, मुख्य रूप से भगवान इंद्र को समर्पित है। पोंगल के पहले दिन को 'भोगी' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन घर की सफाई, नए युग की शुरुआत और नई शुरुआत के लिए समर्पित है। घरों के बाहर सुंदर रंगोलियां (कोलम) बनाई जाती हैं। इस बार यह पर्व 13 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
भोगी पंडिगाई उत्सव से जुड़ी प्रमुख बातें:
मकर संक्रांति: मकर संक्रान्ति, आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना में पेड्डा पाण्डुगा तथा तमिलनाडु में पोंगल के रूप में जाना जाता है। इसके पहले दिन को भोगी पंडिगाई कहते हैं।
अग्निदेव की पूजा: इस दिन लोग अपने घरों से पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं को निकालकर अग्नि में जलाते हैं। यह प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर की बुरी आदतों और नकारात्मक विचारों को त्यागने का दिन है। लकड़ी तथा अन्य ठोस ईंधन वस्तुओं से जले इस अलाव को भोगी मंटालू के रूप में जाना जाता है।
इंद्र देव की पूजा: भगवान इंद्र को 'बादलों और बारिश के देवता' के रूप में पूजा जाता है। किसान अच्छी फसल और समृद्धि के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं और आने वाले वर्ष के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
इंद्र पूजा का नाम: प्राचीन काल में इस दिन को 'इंद्र विझा' (Indra Vizha) के रूप में भी मनाया जाता था।
भोगी मंतलु : इस दिन सुबह घर की पुरानी और बेकार चीजों को आग में जलाया जाता है। यह परंपरा पुरानी बुराइयों को त्यागने और नई शुरुआत का प्रतीक है।
कृषि का महत्व: चूंकि यह फसल उत्सव का हिस्सा है, इसलिए मिट्टी और कृषि उपकरणों का सम्मान भी किया जाता है।
एक रोचक तथ्य: कुछ क्षेत्रों में, इस दिन भगवान विष्णु के 'अंदाल' (Andal) अवतार की कथाओं का भी स्मरण किया जाता है, जिन्होंने भगवान रंगनाथ को प्राप्त करने के लिए मार्गशीर्ष महीने में विशेष व्रत रखा था।