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उज्जैन में नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शनों के लिए उमड़ी भारी भीड़, भगदड़ जैसी स्थिति, कई घायल, प्रशासन ने किया खंडन

Updated: सोमवार, 17 अगस्त 2026 (13:47 IST)
उज्जैन के महाकाल मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी कतार में सोमवार को अफरा-तफरी मच गई। बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के पास करंट फैलने की अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान दर्जनभर श्रद्धालु घायल हो गए, जबकि महाकाल मंदिर प्रशासन ने घटना का खंडन किया है।  ALSO READ: सावन सोमवार पर अशोकधाम मंदिर में बड़ा हादसा, करंट की अफवाह से मची भगदड़; 8 श्रद्धालुओं की मौत
 
हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास हुए इस हादसे घायल हुए लगभग 10 लोगों को उपचार के लिए चरक अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद कुछ समय के लिए दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अमले ने स्थिति को संभाला। फिलहाल दर्शन व्यवस्था सुचारू है। घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। समाचार एजेंसी एएनआई ने भी उज्जैन SP प्रदीप शर्मा के हवाले से बताया कि 2 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस बीच, घायलों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें हिंदू बाई निवासी ढांचा भवन उज्जैन, सागर पुत्र मनीष उम्र 19 वर्ष निवासी किशनपुरा उज्जैन, लक्ष्मीबाई निवासी ढांचा भवन उज्जैन, अनसूया व उसकी मां ममता दोनों निवासी गंजबासौदा, हरिश्चंद्र निवासी ग्राम सिलवासा, वापी गुजरात, सोनम उम्र 18 वर्ष निवासी ग्वालियर, सुजीत कुमार निवासी दरभंगा बिहार, खुशी निवासी ग्वालियर तथा तुलसी व उसकी मां रेखा बाई दोनों निवासी वलसाड गुजरात शामिल हैं।

क्या बोला मंदिर प्रशासन

महाकाल मंदिर प्रशासक, प्रथम कौशिक ने कहा कि कुछ मीडिया एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मंदिर में अफरातफरी एवं अव्यवस्था संबंधी भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिनका मंदिर प्रबंध समिति पूर्णतः खंडन करता है।

उन्होंने कहा कि नागपंचमी, सावन सोमवार एवं भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी एक ही दिन होने से श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक रही। अब तक लगभग 6.19 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। विभिन्न मार्गों पर लंबी कतारों के बावजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुगम दर्शन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। समिति की अपील है कि श्रद्धालु केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करें और भ्रामक अथवा अपुष्ट खबरों को साझा न करें।
 

नागचंद्रेश्वर मंदिर की खासियत

नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। ALSO READ: तारापीठ मंदिर में दर्शन से पहले दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग से 7 श्रद्धालुओं की मौत
 

क्यों वर्ष में एक ही बार खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर?

सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया। लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। 

नागचंद्रेश्वर मंदिर खुलने का समय

नागपंचमी पर वर्ष में एक बार होने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए रात 12 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं। अगले दिन नागपंचमी की रात 12 बजे मंदिर में फिर आरती की जाती है और इसके बाद मंदिर के पट पुनः बंद कर दिए जाते हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा और व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासियों द्वारा की जाती है। 

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