मध्यप्रदेश विधानसभा में दिल्ली के छात्र आंदोलन की गूंज, कांग्रेस का जमकर हंगामा, सदन में चर्चा की मांग
भोपाल। दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के साथ नेता विपक्ष राहुल गांधी के घरने प्रदर्शन की गूंज बुधवार मध्यप्रदेश विधानसभा में सुनाई दी। नीट परीक्षा सहित मध्य प्रदेश में हुई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर विधानसभा में चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस ने जबरदस्त हंगामा किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शून्य काल के दौरान नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों पर सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश कर तुरंच चर्चा की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने छात्र आंदोलन का मुद्दा सिर्फ दिल्ली का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के छात्रों से भी जुड़ा हुआ है, मध्य प्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं में धांधली हुई है और परीक्षा के नाम पर मध्यप्रदेश में अराजकता देखी गई है। प्रदेश के कई युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ है। क्या सरकार सदन इस पर चर्चा नहीं कराएगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले भी कई बार सदन में राज्य और देश में घटी घटनाओं पर चर्चा हुई है। यदि सरकार इस पर आज चर्चा नहीं करना चाहती तो कल करा ले।
वहीं विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को सत्ता पक्ष की ओर से जमकर विरोध हुआ। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि विधानसभा के स्थाई आदेश में भी यह उल्लेखित है कि जो सूचनाएं सुबह 9 बजे के बाद दी जाएगी उन्हें अगले दिन के लिए माना जाएगा. इसमें भी यदि उल्लेखित है कि संबंधित मुद्दा मध्य प्रदेश सरकार के अंतर्गत आना चाहिए, तब ही चर्चा की जाएगी, जबकि यह पूरा मामला केंद्र सरकार से जुड़ा है तो फिर मध्य प्रदेश में इस पर चर्चा का विषय ही नहीं उठता।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। जिस पर विपक्षी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। इसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। वहीं सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु होने पर विपक्ष ने फिर हंगामा शुरु किया तो मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब एक बार विधानसभा अध्यक्ष ने कोई व्यवस्था दे दी तो विपक्ष को इसका सम्मान करना चाहिए। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, जब एक बार कोई व्यवस्था दे दी गई तो उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. कई और विधायक हैं जिस पर सदन में चर्चा होनी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 'सरकार एक तरफ युवा वर्ष मनाने जा रही है लेकिन युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार चर्चा करने को तैयार नहीं है।
