शर्मनाक! बच्चों के दूध के सैकड़ों पैकेट नाले में...

Last Updated: शनिवार, 29 जुलाई 2017 (14:17 IST)
-कुंवर राजेंद्रपालसिंह सेंगर
बागली (देवास)। पिछले दिनों प्राथमिक स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को वितरित होने वाला मिल्क पाउडर पैकेट बागली-पुंजापुरा मार्ग पर स्थित बरझाई घाट के सिपाही खोदरा नाले में बिखरे हुए पाए गए। मध्यप्रदेश सरकार के सहकारी उत्पाद सांची के मिल्क पाउडर पैकेट 1-1 किलोग्राम का था और उसे 23 मार्च से 23 मई 2017 के मध्य वितरित किया जाना था।
 
प्रदेश सरकार की इस योजना का संचालन जनपद पंचायत द्वारा किया जाता है। गुरुवार को मार्ग से उज्जैन जाने वाली कावड़ यात्रा निकलनी थी। जिस कारण प्लास्टिक और पॉलीथिन मुक्त बरझाई घाट अभियान चलाने वाले एनजीओ समाज प्रगति सहयोग के कार्यकर्ताओं ने बिखरे पैकेटों में से लगभग 252 पैकेटों को समेट लिया था। लेकिन कुछ पैकेट अभी भी वहीं पड़े हैं। साथ ही घाट की सुंदरता निहारने वाले सैलानियों और ग्रामीणों ने पैकेटों को फाड़कर भी देखा। जिस कारण मिल्क पाउडर के नीले-गुलाबी निशान चट्टानों पर उभरे हुए थे। मजे की बात है कि गुरुवार को जब यह सब कुछ चल रहा था तब ही जिला कलेक्टर अशीषसिह जिले व अनुभाग के कई अधिकारियों के दल के साथ मार्ग से होकर गुजरे और घटना को नजर अंदाज कर दिया।
 
दोषी कौन : प्रदेश सरकार द्वारा स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोषक तत्व प्रदान करने के लिए मिल्क पाउडर से बने के वितरण की शुरुआत गत वर्ष की थी। जिसमें प्रदेश शासन के सहकारी उत्पाद सांची का मिल्क पाउडर सप्ताह में दो दिन घोल कर बच्चों को दिया जाता है। योजना का संचालन जनपद पंचायत द्वारा किया जाता है। जिसमें बच्चों को दी जाने वाली मात्रा और बच्चों की संख्या के मान से जनपद शिक्षा केन्द्र कार्यालय द्वारा उसकी मांग शासन को की जाती है।
 
पैकेटों की आपूर्ति हो जाने के बाद जनपद शिक्षा केन्द्र द्वारा स्कूलों में व महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय द्वरा आंगनवाड़ी केंद्रों पर भेजे जाते हैं। 23 मार्च से 23 मई 2017 के मध्य उपयोग होने वाले दूध पाउडर पैकेट का वितरण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों दोनों में होना था। जप से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मार्च-अप्रैल माह के दूध पैकेट का वितरण जनपद पंचायत के द्वारा ही किया गया। वार्षिक परीक्षा के बाद 30 अप्रैल को स्कूल बंद हो गए और बच्चों की छुट्टी शुरू हो गई। जबकि आंगनवाड़ी केंद्रों पर अवकाश का कोई प्रावधान ही नही है। ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि एक्सपायर्ड दूध पाउडर पैकेटों को डिसपोज करने के लिए बरझाई घाट के खुले क्षेत्र में फेंका किस विभाग ने है।
 
तालाब का जल दूषित होने का खतरा : बरझाई घाट में बहने वाला सिपाही खोदरा नाला आगे जाकर उदयनगर तहसील के सबसे बड़े तालाब कूप तालाब में मिलता है जबकि कूप तालाब से 24 ग्रामों को जलापूर्ति होती है। यदि एक्सपाइरी डेट निकलने के बाद दो माह पुराना दूध पाउडर नाले के पानी के साथ बहकर तालाब में मिलता है तो तालाब में किए जा रहे मत्स्य उत्पादन के प्रभावित होने और पेयजल के दूषित होने की आशंका है।
 
बच्चों में फ़ूड पाइजनिंग का खतरा : इस मामले में निजी चिकित्सक डॉ जॉन जोसेफ और डॉ. केएस उदावत ने बताया कि यदि बच्चे एक्सपायर्ड दूध पाउडर से निर्मित दूध पीते है तो उससे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही उससे फ़ूड पाइजनिंग होने का खतरा भी होता है।
 
ऐसे आया मामला प्रकाश में : गुरुवार को जिले की सबसे बड़ी बोल बम कावड़ यात्रा (धाराजी से उज्जैन) का बागली नगर में आगमन था। पिछले दो वर्षों से जल संरक्षण और महिला आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कार्यरत नीमखेड़ा बेस्ड सामाजिक संस्था समाज प्रगति सहयोग बागली स्पोर्ट्स और पर्यावरण संस्था के साथ मिलकर प्लास्टिक और पॉलीथिन मुक्त बरझाई घाट अभियान चला रहे हैं। जिसके तहत समय समय पर स्वयंसेवी सफाई अभियान चलाते हैं। साथ ही कावड़ यात्रा के दौरान प्लास्टिक के प्रयोग से बचने और श्रद्धालुओं द्वारा कावड़ यात्रियों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थ के दोनों को संग्रहीत भी करते हैं। गुरुवार को यात्रा के आगमन से पूर्व स्वयं सेवियों ने दूध पाउडर के पैकेटों को देखने के बाद उन्हें संग्रहित किया था।
 
बागली तहसीलदार बीएस श्रीवास्तव ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित भी किया जाएगा और मार्गदर्शन प्राप्त करके कार्यवाही की जाएगी। दूध पाउडर के पैकेट एक्सपायर्ड थे। इसका मतलब यह है कि दूध पैकेटों को बच्चों में वितरण नहीं किया गया या फिर दूध आपूर्ति करने वाले कार्यालयों ने कोई लापरवाही बरती है। 



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