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Motivation Quotes : दिमाग ही तुम्हारा दुश्‍मन है...

सोमवार,मई 17, 2021
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ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन लिए हुए हो पर जिसकी जेब में ये बसते हैं वो ही इस दुनिया में सबसे रुतबेदार है। इसी के आस-पास सारी दुनिया घूमती है। फिर भी पैसा ...
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बात उन दिनों की हैं जब 80 का दशक उम्र की ढ़लान पर था और हिंदी सिनेमा जगत में श्रीदेवी का सितारा कामयाबी की बुलंदियां छू रहा था। बॉलीवुड
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ये तो लाशें हैं साब, ये प्रश्न कहां करती हैं, अगर ये बिलखते बच्चे होते, तो अपने मर चुके मां-बाप का पता पूछते,
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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। वैसे जो जेन भिक्षुओं की कई कहानियां हैं और वह बड़ी ही प्रेरक होती है। आओ इस बार पढ़ते हैं दो भिक्षुओं की कहानी।
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सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'ट्विटर' पर किसी आलोचक ने ट्वीट किया था कि: '2014 में जिसके पास हर समस्या का हल था, वही आदमी आज देश की सबसे बड़ी समस्या बन गया है।' इस ट्वीट में सिर्फ़ एक बदलाव- देश की जगह पार्टी- कर दिया जाए तो मेरी आगे की बात साफ़ हो
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अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस हर साल 15 मई को मनाया जाता है। हर साल विश्व परिवार दिवस की संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक थीम तैयार की जाती है। इस बार कोरोना काल को
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आज के दौर में समय और संबंध की वैल्यू बढ़ गई है। जो लोग यह समझते थे कि पैसा हर समस्या का हल है उनकी धारणा बदली है। फिर भी आपको यह समझना होगा कि भाग्य से बढ़कर आज के दौर में कर्म या भागीरथी पराक्रम महत्वपूर्ण हो चला है। इसके अलावा कई स्तर पर हमें अपनी ...
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टेंशन (Tension) यानी तनाव या चिंता और डिप्रेशन (depression) यानी अवसाद। कोरोनावायरस जैसी महामारी के दौर में यह बहुत ज्यादा हो चला है। भय के कारण संकट उत्पन्न होता है और संकट उत्पन्न होने के कारण टेंशन और लगातार टेंशन रहने के कारण व्यक्ति डिप्रेशन ...
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दुर्भाग्य से अब बदल गई है ये सुरसरिता, विपथगा जो हमारे दुष्कर्मों से ‘मोक्षदायिनी से शव वाहिनी’में बदल गई। हे मन्दाकिनी! पाप नाशिनी! दया करो...हम तुम्हारी मर्यादा की रक्षा नहीं कर पाए हमें माफ़ करो.... हे अमृता! अज्ञानियों ने तुम्हें विषैला व मैला ...
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स्वप्न जो देखा था रात्रि में हमने सुबह अश्रु बन बह किनारे हो गए हैं चांद और मंगल पर विचरने वाले हम आज कितने बेसहारे हो गए हैं विकास की तालश में हमने हमेशा
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जिस समय देश के करोड़ों-करोड़ नागरिकों के लिए एक-एक पल और एक-एक सांस भारी पड़ रही है, सरकारें महीने-डेढ़ महीने थोड़ी राहत की नींद ले सकतीं हैं। यह भी मान सकते हैं कि जनता चाहे कृत्रिम सांसों के लिए संघर्ष में लगी हो, देश के नियंताओं को कम से कम किसी ...
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कैफी की कलम का करिश्मा ही था कि वे ‘जाने क्या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें’, जैसी कलात्मक रचना के साथ सहज मजाकिया ‘परमिट, परमिट, परमिट....परमिट के लिए मरमिट’ लिखकर संगीत रसिकों को गुदगुदा गए।
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सच में आपदा के मौके पर भी अगर किसी की इंसानियत मर गई तो वह जीते जी मुर्दे से भी बदतर है। इससे बड़ा मौजूदा सवाल यह कि भरोसा किस पर करें? उन दवा विक्रेताओं पर जिन्हें हर कोई बहुत ही आशा भरी निगाहों से देखता है या नहीं?
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महाराणा प्रताप की मृत्यु का समाचार सुनकर अकबर की आंखों में भी प्रताप की अटल देशभक्ति को देखकर आंसू छलक आए थे। मुगल दरबार के कवि अब्दुर रहमान ने लिखा है, 'इस दुनिया में सभी चीज खत्म होने वाली है। धन-दौलत खत्म हो जाएंगे लेकिन महान इंसान के गुण हमेशा ...
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राणा सांगा का ये वंशज, रखता था राजपूती शान। कर स्वतंत्रता का उद्घोष, वह भारत का था अभिमान। मानसिंग ने हमला करके, राणा जंगल दियो पठाय। सारे संकट क्षण में आ गए, घास की रोटी दे खवाय।
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माँ देहरी पर सजती कुंकुम रंगोली है, घर को आलोकित करता निष्कंप दीपक है, अंजुलि से 'आदित्य' को चढ़ता आस्था का अर्घ्य है और चमकते चंद्रमा सा एक शीतल धैर्य है। वह जीवन की पाठशाला की गुरुजी ही नहीं बल्कि चॉक, कलम, पट्‍टी और तड़ातड़ पड़ती छड़ी भी वही है।
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फिर एक मदर्स डे आया है और मैं एक खत लिख रही हूँ...किसे लिख रही हूँ नहीं जानती... किसे कहूं अपने मन की व्यथा? एक तरफ मैं हूँ मां....दूसरी तरफ एक सिस्टम है और बीच में है जिंदगियों को निगलता कोरोना... और हम मना रहे हैं (अन) हैप्पी मदर्स डे”
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कोरोना महामारी से हो रही मौतों के बीच सोशल मीडिया पर कुछ नागरिक समूहों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की मांग यह मानकर की जा रही है कि इससे मौजूदा संकट का तुरंत समाधान हो जाएगा। इसके लिए जन-याचिकाओं पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं।
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वेदों में 'मां' को 'अंबा','अम्बिका','दुर्गा','देवी','सरस्वती','शक्ति','ज्योति','पृथ्वी' आदि नामों से संबोधित किया गया है। इसके अलावा 'मां' को 'माता', 'मात', 'मातृ', 'अम्मा', 'अम्मी', 'जननी', 'जन्मदात्री', 'जीवनदायिनी', 'जनयत्री', 'धात्री', ...
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