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New Guidelines: OTT के वो सारे ‘तांडव’ जो भारत में नहीं माने गए ‘सुटेबल’

गुरुवार,फ़रवरी 25, 2021
OTT platform and controversy
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जिंदगी में असफल होने के कई कारण हो सकते हैं और असफलत होना कोई बुरी बात भी नहीं है। कई महान लोग ऐसे हैं जो अपनी जिंदगी में कई बार असफल होने के बाद ही सफल हुए हैं। असफल होने के कारणों की जांच करके वे सफल हो गए तो आप भी क्यों नहीं अपने असफल होने की ...
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यह कहानी कई तरह से लोग सुनाते हैं। कोई इसे गुरु और शिष्य से जोड़कर सुनाता है और कोई इसे पिता और पुत्रों से जोड़कर सुनाते हैं। असल में यह कहानी श्रावस्ती के अमरसेन नामक एक व्यक्ति के साथ जोड़कर ज्यादा बताई जाती है। यहां गुरु और शिष्य से जुड़ी कहानी ...
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लेखिका ज्योति जैन साहित्य संसार में तेजी से लेकिन सरलता से उभरता वह चमकता नाम है जिसने साहित्य की लगभग हर विधा में स्वयं को सुव्यक्त किया है। वे जब लघुकथा लिखती हैं तो उनका प्रभाव
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हकीकत भी यही है कि ‘दुनिया मेरी मुट्ठी में’ का असल सपना Internet ने ही पूरा किया। लेकिन अब बड़ा सच यह भी है कि इस सेवा का जरिया बने यूजर्स से ही कमाई कर रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स न केवल चोरी-छिपे न केवल सायबर डाकैती करते हैं बल्कि यूजर्स डेटा को ...
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कहते हैं तस्‍वीरें कभी झूठ नहीं बोलती-- ‘अ फोटो इज इक्‍वल टू थाउजेंड वर्ड्स’, लेकिन यह मिथक अब पूरी तरह से बदल चुका है। सोशल मीडिया पर नजर आने वाली तस्‍वीरों की मदद से ही यह झूठ आदमी के जेहन तक पहुंचता है। यह झूठ अक्‍सर वीडि‍यो के तौर पर और कई ...
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आत्म विश्वास सेहत और सफलता का आधार है। कमजोर आत्म विश्वास से बहुत सारी शारीरिक और मानसिक बीमारियों का जन्म होता है साथ ही जीवन के हर मोड़ पर असफलता का मुंह देखना पड़ता है। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए शरीर और मन में स्वस्थ्‍य अनुभव करना जरूरी है। आत्म ...
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दुनिया के कई देशों में पहले ही कोरोना की दूसरी और कहीं-कहीं इसके बाद की भी लहरें दिखने लगी हैं। भारत में भी विशेषज्ञ लगातार चेता रहे थे। लेकिन हम हैं कि मान नहीं रहे थे। अब महाराष्ट्र और दक्षिण के रास्ते तेजी से फैल रहे नए रूप के कोरोना वायरस ने ...
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फिर साठ के दशक में एक पुरानी बस के निकलने का समय लोगों को पता चल गया। वह गुप्ताजी की बस थी। एक से दो हुईं। दो से चार। तीन दशक में पचास बसें हो गईं। इन्हीं तीस सालों में सरकारी रोडवेज को सरकारों ने बेचकर शानदार दावत मनाई। जब गांव से वह पहली बस चली तो ...
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सच्ची लगन, कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास से उच्च शिखर पर बढ़ती रहो, अपनी लक्ष्मण-रेखा स्वयं खींच कर मान-सम्मान की गरिमामयी
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यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था की भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में सर्वशक्तिमान माने जाने वाले राजेंद्र सिंह को वहां से बेदखल होना पड़ेगा। पिछले 15 साल में राजेंद्र के अर्थ तंत्र से उपकृत होने वालों की संख्या हजारों में है और यह सब उनके प्रबल ...
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हर ओर सरकारी खर्चे के चर्चे हैं। जनता के हाथों में केवल चुनावी पर्चे हैं। इसलिए मंहगाई पर न बात करो। सियासी पैंतरों पर सिर्फ़ टाईम पास करो। ये वक्त भी कट जाएगा, सत्ता पर जो भी आएगा -जनता के खाते में तो वही शून्य आएगा। हमारे पास समय कम था, लोकतन्त्र ...
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डॉ. संध्या भराड़े द्वारा लिखित आत्मकथा शैली में 'कस्तूरबा' नामक पुस्तक प्रकाशित है। प्रथम पुरुष में लिखी गई इस कृति में कस्तूरबा अपनी कहानी स्वयं सुना रही हैं।
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मति का अर्थ बुद्धि या अक्ल होता है। यह बुद्धि या अक्ल आती है सोचने, विचार करने और तर्क करने से। कई लोग यह कार्य नहीं करते हैं। बस अपनी भावनाओं के अनुसार ही सोचते और समझते हैं। जैसे एक पशु कुछ भी देख या सुनकर रियेक्ट करता है उसी तरह से कई मनुष्ट सोच ...
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मधुबाला! भारतीय रजतपट की वीनस! वीनस यानी शुक्र। आकाश का सबसे अद्वितीय सितारा। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि शुक्र कलात्मक गतिविधियों, सौंदर्य और भौतिक सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
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मैं जानता हूं कि तुम मेरे साथ रहने की इच्छुक हो। मुझे लगता है कि हम दोनों को अपने-अपने कार्य में लगे रहना चाहिए। फिलहाल यह उचित होगा कि तुम जहां हो वहीं ठहरो।
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आज के बूफे के दौर से कुछ वर्षों पीछे जाकर यदि सोच सकें तो सहभोज की पंगत याद कर लीजिए.....।
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मन क्या है? मन कैसे खुलता है? मन का दिल से क्या रिश्ता है? कैसे मन खुलता है तो दिल भी खुलता है? वास्तव में हम जो महसूस करते हैं जैसा सोचते और विचारते हैं
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हुकूमतों को अगर गिलहरियों की हलचल से भी ख़तरा महसूस होने लगे तो समझ लिया जाना जाना चाहिए कि हालात कुछ ज़्यादा ही गम्भीर हैं और नागरिकों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो जाना चाहिए। ‘जलवायु परिवर्तन’ (climate change) के क्षेत्र से जुड़ी इक्कीस साल ...
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बूंदे सोचें बादल में, कहां मैं बरसूं आज, कटे झाड़ हैं, गले हाड़ हैं, आवे मोहे लाज।
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