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क्या कोरोना काल में भी भारत दुनिया का सबसे खुशहाल देश है?

मंगलवार,अप्रैल 7, 2020
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व्यक्तिवाद और व्यक्ति की प्रधानता के सिद्धांतों को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं:
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गोस्वामी तुलसीदासजी सुंदरकांड को लिपिबद्ध करते समय हनुमानजी के गुणों पर विचार कर रहे थे। वे जिस गुण का सोचते, वहीं हनुमानजी में भरपूर दिखाई देता। इसलिए उन्होंने हनुमानजी की स्तुति करते समय उन्हें 'सकल गुण निधानं' कहा है। यह सम्मान पूरे संस्कृत ...
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उन्‍होंने बार्स‍िलोना से अपना सफर शुरू क‍िया और दुबई पहुंचे। दुबई से मुंबई। इस तरह 5 द‍िसंबर को वे भारत आए।
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इतनी पीड़ा तो देश की जनता ने तब भी महसूस नहीं की थी, जब प्रिंस चार्ल्स के संक्रमित होने की ख़बरें आई थीं
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नौ मिनट के सफलतापूर्वक किए गए देशव्यापी अंधेरे ने आगे आने वाले दिनों की सूरत पर अब काफ़ी रोशनी डाल दी है। जिस बात की इतने दिनों से हमें आशंका थी वह भी अब सच होती दिख रही है।
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पुल‍िस के बल‍िदान की कहान‍ियां सुनकर हर कोई भावुक है, हर क‍िसी की आंख में पानी है।
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कुलवंत को डायबिटीज, हाइपरटेंशन के साथ-साथ उन्‍हें पांच स्टेंट्स लगे हैं। ऐसी स्‍थि‍त‍ि में उन्‍हें कोरोना के संक्रमण हो गया।
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क्या सत्ता में महिलाओं की सहभागिता की वही स्थिति हैं जो बीस साल पहले हुआ करती थी? इस प्रश्न पर अक्सर आंकड़ों के आकलन होने लगते है|
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हम लोग, हमारा आचरण, हमारा अति उत्साह, हमारी बुद्धि, हमारी संवेदनशीलता, हमारा मनुष्यत्व सभी कुछ शोध का विषय होता जा रहा है। कल 5 अप्रैल 2020 के प्रकाशोत्सव की आड़ में कुछ लोगों की मूढ़ता ने फिर हमें इंसानियत के कटघरे में खड़ा किया है?
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नौ मिनट का पूर्ण (या आंशिक भी) अंधकार अगर मांग कर लिया गया हो तो कितना ‘लम्बा’ या ‘छोटा’ लग सकता है रविवार की रात करोड़ों देशवासियों ने महसूस कर लिया। यह एक अघोषित प्रयोग भी हो सकता है कि बग़ैर रोशनी के हम कितनी देर तक बिना डरे या परेशान हुए रह सकते ...
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रात का अंधेरा गहरा रहा था, लेक‍िन उम्‍मीदों का उजाला चमकने लगा था।
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अगर ये लोग बीमार होते हैं, तो न तो कोई डॉक्‍टर है देखने वाला और न ही कोई अस्‍पताल उनलब्‍ध है इनके इलाज के ल‍िए।
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ब्रिटेन में एक मां को अपने बेटे का अंतिम संस्कार ‘ऑनलाइन’ देखना पड़ा।
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तो बांटने की प्रथा को जारी रखते हुए.. आज बांटते हैं.. रोशनी..नन्हे दीप की.. जो जले मेरी देहरी पर,उजाला हो तेरे आंगन में .... जो जले तेरी देहरी पर,उजाला हो मेरे मन में.. इस तरह जले करोड़ों दीये और उजाला हो.. इस धरा पर,उस गगन में .. समूची दुनिया ...
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हवा का रुख़ देखकर लगता है कि लोगों की बेचैनी बढ़ रही है, वे पहले के मुक़ाबले ज़्यादा नाराज़ होने लगे हैं और अकेलेपन से घबराकर बाहर कहीं टूट पड़ने के लिए छटपटा रहे हैं।
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ये ये अपने इंदौर को किसकी नजर लग गई रे! डिठौना लगा दो मिलकर इसकी सुंदर, सलौनी, स्वच्छ शक्ल पर। माथे किनारे लगाएं काजल का टीका। और बचाएं इसे बुरी नजर से, हम सब मिलकर। नजर उतारो इसकी पावन कलश विधान से, जो है सबके लिए एक समान। उतारो नजर इसकी राई-नून
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आइये, चलें...कोरोना के इस घनघोर अंधकार की लड़ाई में एक और ज्योति-प्रकाश अध्याय जोड़ने चलें। सिर्फ नौ मिनिट...क्योंकि ये लड़ाई है दिए की और तूफान की। पर अंत में हमेशा ऐसे तूफान रूपी अन्धकार को भी हार मान लेनी पड़ेगी जब हमारा पूरा देश अपनी देहरी पर अपने ...
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल, रविवार को रात्रि नौ बजे देशवासियों से एक दिया जलाने, प्रकाश करने की अपील क्या कर दी कि देश की मोदी विरोधी राजनीति में जलाजला सा आ गया। सबसे पहले कांग्रेस नेता श्री अधीररंजन चैधरी ने मीडिया पर आकर घोषित ...
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दरअसल रॉय ने राजनीति से लेकर गरीबी और स्वास्थ्य आदि से जोड़ते हुए एक लेख लिखा है। इसी लेख के बाद उनका नाम ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा। ज‍िसमें लोगों ने उन्‍हें खूब आलोचना की।
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