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Delhi violence: 10 मुस्‍लिम परिवारों को बचाकर हिंदुओं ने दो दिन घर में रखा, खाना खिलाया, सुरक्षा घेरे में पहुंचाया घर तक

शुक्रवार,फ़रवरी 28, 2020
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उमरिया हिरनिया हो गई, देह इन्द्र-दरबार। मौसम संग मोहित हुए, दर्पण-फूल-बहार॥ शाम सिंदूरी होंठ पर, आंखें उजली भोर। भैरन नदिया सा चढ़े, यौवन ये बरजोर॥ तितली झुक कर फूल पर, कहती है आदाब।
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मैंने कहा मित्र, धर्म के नाम पर, जनता को भड़काना, ऊंगली के इशारे पर देश को नचाना, हमारा काम नहीं है। होली के रंग में, इनका स्थान नहीं है। स्नेह के रंग में महकना, गुलाब-सा मुस्कुराना, चमन को सजाना संवारना, होली के प्रतीक हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस ने वहां करीब 50 हजार लोगों की जान को लील लिया है और इतने ही लोगों के शवों को चीन की सरकार जला चुकी है।
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आईबी के अंकित शर्मा की संगठित तरीके से हत्या कर दी जाती है और नाले पर लाश को फेंक दिया जाता है।
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सांप्रदायिकता और अराजकता के इस माहौल में भी महिलाएं अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं
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हॉलीवुड के फिल्म निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने किसी समय किसी प्रसंग में यह बात कही थी। आपको भी इससे सीख मिल सकती है। हालांकि ऐसे बातें पूर्व में कई विद्वान लोगों ने कही है। भाषा और संदर्भ बदलते रहते हैं, लेकिन सत्य वहीं का वहीं रहता है।
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इन सब के बीच भी दिल्‍ली के ही कुछ इलाकों से हिंदू-मुस्‍लिम भाईचारे की उम्‍मीद भरी तस्‍वीरें सामने आ रही हैं।
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मैं दिल्‍ली हूं, जब देश की बात होती है तो लाखों-करोड़ों लोग मेरी तरफ उम्‍मीद भरी निगाहों से देखने लगते हैं, क्‍योंकि मैं वो जगह हूं जहां से पूरे देश की धड़कन रवां होती है। इसलिए मुझे दिल भी कहते हैं, लेकिन मैं दिल ही की तरह मायूस हो गई हूं। मजबूर भी ...
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कृष्ण काल में नंदा नाम की एक गाय थी। चारा चरते हुए झुंड से बिछड़ गई और वहां पहुंच गई जहां एक बाघ बैठा था। बाघ गरजते हुए नंदा पर टूट पड़ा। नंदा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसे अपना नन्हा बछड़ा याद आने लगा। उसके आंसुओं की धारा बह निकली।
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हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। मैं कहती हूं कि विश्वभर को महिला दिवस मनाने की आवश्यकता ही नहीं है। ऐसा नहीं है कि हमारे देश में देवी की पूजा नहीं होती है।
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ओशो रजनीश के पत्रों के संकलन से एक कथा- बात उस समय की है जब लाइट नहीं थी। लोगों ने अंधकार को दूर करने के बहुत उपाय सोचे, पर असफल रहे। तब एक चिंतक ने कहा- हम अंधकार को टोकरियों में भरकर गड्ढों में डाल दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे अंधकार समाप्त हो
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अपने दैनिक जीवन में हम प्रायः कंफर्ट अर्थात् सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। ठंडी हवा चाहिए, तो कूलर है, एसी है। गर्मी चाहिए, तो हीटर है। पानी गर्म करना हो, तो गीजर है।
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जहां की यह दास्‍तान है वहां के लोग अतीत की इस खौफनाक कहानी की आहटभर से आज भी कांप जाते हैं, सहम जाते हैं।
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साहित्यिक समागम से आपले वाचनालय में आयोजित रचना संवाद कार्यक्रम भाषाई वैशिष्ट्य और समृद्धि से महक उठा।
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श्रीदेवी के बाद हमने एक ऑफस्क्रीन उदासी और ऑनस्क्रीन सेंस ऑफ ह्यूमर खो दिया।
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संयुक्त राष्ट्र ने बीते वर्ष जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन किया था जिसमें मानव जनित जलवायु परिवर्तन पर चिन्तन हुआ।
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निश्चय ही ज्यादातर नेता शपथग्रहण के निमंत्रण का इंतजार कर रहे होंगे।
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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि संतों के या तीर्थंकरों के प्रवचन या उनकी शिक्षाएं कितनी काम की होती है।
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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