Hanuman Chalisa
✕

संबंधीजन

Written By WD
Updated: बुधवार, 9 जुलाई 2014 (20:07 IST)
- विजयशंकर चतुर्वेदी

हाथ पिता जैसे
चेहरा-मोहरा मिलता होगा जरूर
कुटुंब के किसी आदमी से

हो सकता है मिलता हो दुनिया के पहले आदमी से
मेरे उठने बैठने का ढंग
बोलने-बतियाने में हो उन्हीं में से किसी एक का रंग
बहुत संभव है मैं होऊँ उनका अंश
जिन्होंने देखे हों दुनिया को सुंदर बनाने के सपने
क्या पता गुफाओं से पहले पहल निकलने वाले रहे हों मेरे अपने
या फिर पुरखे रहे हों जगद्गुरु शिल्पी
गढ़ गए हों दुनिया भर के मंदिरों में मूर्तियाँ
उकेर गए हों भित्तिचित्र
कौन जाने कोई पुरखा मुझ तक पहुँचा रहा हो ऋचायें
और धुन रहा हो सिर

निश्चित ही मैं सुरक्षित बीज हूँ सदियों से दबा धरती में
सुनता आया हूँ सिर पर गड़गड़ाते हल
और लड़ाकू विमानों का गर्जन

यह समय है मेरे उगने का
मैं उगूँगा और दुनिया को धरती के किस्सों से भर दूँगा
मैं उनका वंशज हूँ जिन्होंने चराईं भेड़ें
और लहलहा दिए मैदान

संभव है कि हमलावर मेरे कोई लगते हों
कोई धागा जुड़ता दिख सकता है आक्रांताओं से
पर मैं हाथ तक नहीं लगाऊँगा चीजों को नष्ट करने के लिए
भस्म करने की निगाह से नहीं देखूँगा कुछ भी
मेरी आँखें माँ जैसी हैं
हाथ पिता जैसे।
Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?