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Written By DW
Last Modified: शनिवार, 13 दिसंबर 2025 (08:17 IST)

क्या यूरोपीय संघ को कमजोर करना चाहते हैं ट्रंप?

ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति दिखाती है कि अमेरिकी 'मागा' समर्थकों और यूरोपीय धुर-दक्षिणपंथियों की सोच कितनी मिलती है। कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि यूरोपीय संघ को तोड़ने और कमजोर करने की योजनाएं भी बन रही हैं।

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आंचल वोहरा ब्रसेल्स
ट्रंप की विदेश नीति के नजरिए के औपचारिक स्वरूप ने यूरोप में कई लोगों को परेशान कर दिया है। बहुत से यूरोपीय लोग नई अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को अपने आंतरिक मामलों में सीधा दखल मानते हैं। इस दस्तावेज में यह बात जाहिर की गई है कि अमेरिका की मौजूदा सरकार का मकसद यूरोपीय धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों को बढ़ावा देना है।
 
ब्रसेल्स में मौजूद ‘ब्रूगल थिंक टैंक' के सीनियर फेलो गुंट्राम वोल्फ ने कहा, "यह यूरोप की घरेलू राजनीति में दखल देने, राजनीतिक प्रक्रिया को कमजोर करने और धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों को बढ़ावा देने की कोशिश है।”
 
विशेषज्ञों का कहना है कि इस रणनीति से सिर्फ इस बात की पुष्टि नहीं होती है कि इमिग्रेशन (आप्रवासन) जैसे मामलों पर विचारधाराएं मिलती हैं, बल्कि यह एक बड़ी साजिश की ओर संकेत करती है। यह यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों को उनकी विचारधारा के आधार पर बांटने और इस समूह को कमजोर करके इस पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का संकेत है।
 
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में एसोसिएट रिसर्चर सुजाना वेघ ने कहा कि यूरोपीय संघ को वैश्विक मंच पर कमजोर करने से मौजूदा अमेरिकी प्रशासन का मकसद पूरा होता है: "अगर यूरोप बंट जाए, तो वह कमजोर हो जाएगा और व्यापार से जुड़े मामलों में उस पर हावी होना आसान होगा।”
 
'मागा' समर्थक और यूरोपीय धुर-दक्षिणपंथी समान कैसे
यूरोप की कई धुर-दक्षिणपंथी पार्टियां, जैसे हंगरी की फिडेज, जर्मनी की एएफडी, और फ्रांस की नेशनल रैली, आप्रवासन के खिलाफ हैं। इन पार्टियों ने अलग-अलग मौकों पर यूरोपीय संघ के प्रति अपना संदेह जाहिर किया है।
 
मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के समर्थकों का विचार भी अक्सर यूरोप के धुर-दक्षिणपंथियों से मिलता-जुलता है, खासकर इस्लामिक देशों से आप्रवासन के मामले में। अब अमेरिकी सुरक्षा दस्तावेज में आगाह किया गया है कि अगर आप्रवासन की दरें ऊंची रहीं और जन्म दर कम रही, तो अगले दो दशकों में यूरोप की अपनी "सभ्यता खत्म हो सकती है”।
 
इस दस्तावेज में यूरोपीय संघ पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वह लोगों की बोलने की आजादी छीन रहा है और राजनीतिक विरोधियों को दबा रहा है। दस्तावेज अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत देता है कि यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम (डीएसए) दक्षिणपंथी समर्थकों को अपनी बात कहने से रोक रहा है। जबकि, यूरोपीय संघ का दावा है कि यह कानून नागरिकों को इंटरनेट पर फैल रहे दुष्प्रचार से बचाने के लिए है।
 
पिछले सप्ताह, यूरोपीय संघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर 120 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना विज्ञापन में पारदर्शिता न रखने और अन्य नियमों का उल्लंघन करने के लिए लगाया गया था। इसके जवाब में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूरोपीय संघ की सख्त आलोचना की और उस पर आरोप लगाया कि वह "बेकार के मामलों को लेकर अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना रहा है।”
 
इसके तुरंत बाद, यूरोप की धुर-दक्षिणपंथी पार्टियां एक्स के समर्थन में आ गईं और ईयू के खिलाफ विरोध जताया। हंगरी के प्रधानमंत्री और नेशनलिस्ट फिडेज ग्रुप के नेता विक्टर ओरबान ने एक्स पर लिखा, "जब यूरोपीय संघ के नेता बहस में नहीं जीत पाते हैं, तो वे जुर्माना लगाने लगते हैं। यूरोप को बोलने की आजादी चाहिए, न कि बिना चुने हुए नौकरशाह जो यह तय करें कि हम क्या पढ़ और बोल सकते हैं।”
 
जर्मनी की एएफडी पार्टी की नेता एलिस वाइडेल ने पोस्ट किया, "यूरोपीय आयोग को अपने नागरिकों पर सेंसरशिप और उनकी चैट को नियंत्रित करना पसंद है। वे बोलने की आजादी पर रोक लगाकर आलोचना करने वाली आवाजों को चुप कराना चाहते हैं।”
 
ट्रंप क्या हासिल करना चाहते हैं?
राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज के मुताबिक, यूरोप के लिए अमेरिका की व्यापक नीति में सबसे पहले यह जरूरी है कि ‘यूरोपीय देशों के भीतर यूरोप की मौजूदा रणनीति के खिलाफ विरोध और असहमति को बढ़ावा दिया जाए।'
 
ईसीएफआर की वेघ ने कहा कि दस्तावेज से पता चलता है कि मौजूदा अमेरिकी सरकार की रणनीति यह है कि किसी देश में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के साथ काम करने के बजाय, वह उस देश के अंदर ही राजनीतिक सहयोगियों को ढूंढ रहा है। उन्होंने आगे कहा, "यह परंपरागत कूटनीतिक संबंधों से हटकर है, जिनका लक्ष्य देशों के बीच अच्छे संबंध स्थापित करना होता है। इसके बजाय, अब पार्टियों के आपसी संबंधों और पार्टी स्तर की कूटनीति को महत्व दिया जा रहा है।”
 
वेघ के मुताबिक, यह दस्तावेज यूरोपीय संघ पर अब तक का सबसे तीखा हमला है। इसकी रणनीति है कि "उन राजनीतिक नेताओं और समूहों का समर्थन किया जाए जिनके विचार अमेरिकी सरकार के साथ मेल खाते हैं। इस तरह यूरोप की राजनीति को ट्रंप प्रशासन के हित में मोड़ा जाए।” वेघ ने आगे बताया, "कुछ हद तक यह विचार उन उदारवादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को चुनौती देने जैसा लगता है जो यूरोपीय संघ की नींव हैं और उसे जोड़े रखते हैं। अमेरिकी प्रशासन यूरोप के धुर-दक्षिणपंथियों का साथ दे रहा है क्योंकि वे खुद यूरोपीय संघ में रहते हुए उसे चुनौती देते हैं।”
 
वोल्फ का भी मानना है कि अमेरिका अपने फायदे के लिए ईयू को कमजोर कर रहा है। यूरोप की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा, "यूरोपीय कंपनियां बेहतर तरीके से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के दम पर फलती-फूलती हैं, जो एक मजबूत और एकीकृत यूरोपीय संघ और उसके सिंगल मार्केट (एकल बाजार) की वजह से संभव है। अगर आप ईयू और उसकी बुनियाद, यानी सिंगल मार्केट पर हमला करते हैं, तो आप उन यूरोपीय कंपनियों के हितों को भी नुकसान पहुंचाते हैं जो कई देशों में काम करती हैं।”
 
वह आगे कहते हैं, "सुरक्षा के मोर्चे पर यह नीति रूस की सोच से तालमेल खाती है। व्लादिमीर पुतिन ने पहले भी कहा है कि वह इस रणनीति के पक्ष में हैं। स्वाभाविक है कि पुतिन का मकसद मध्य यूरोपीय देशों पर अपना दबदबा दोबारा स्थापित करना है।”
 
धुर-दक्षिणपंथियों को बढ़ावा मिलेगा या ट्रंप का दांव उल्टा पड़ेगा?
अब तक यह साफ नहीं है कि ट्रंप प्रशासन की यह सोच वास्तव में किसी ठोस अमेरिकी समर्थन, जैसे कि फंडिंग में बदलेगी या नहीं, खासकर यूरोप की धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों के लिए।
 
वेघ का कहना है, "पहले यूएस एड दुनिया भर में लोकतंत्र को मजबूत करने वाले सिविल सोसायटी समूहों को अनुदान देता था। अब यूएस एड खत्म हो गया है, लेकिन अमेरिकी सरकार यूरोप में अपने वैचारिक सहयोगियों से जुड़े संगठनों को मदद देने के लिए नए रास्ते बना सकती है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सहयोग सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिया है।”
 
वहीं, वोल्फ का कहना है कि अगर यूरोप की धुर-दक्षिणपंथी पार्टियां सार्वजनिक तौर पर ट्रंप के साथ अपनी घनिष्ठता दिखाती हैं, तो उन्हें इसका उल्टा नुकसान हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, "जैसे-जैसे लोग इस बात से अवगत होते जाएंगे कि ऐसा रिश्ता यूरोप की खुशहाली और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है, तो शायद विरोध शुरू हो जाए। तब यूरोपीय लोग धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों को यूरोप के हितों का नुकसान पहुंचाने वाले के तौर पर देख सकते हैं।”
 
अमेरिका के ब्रसेल्स ऑफिस के जर्मन मार्शल फंड के फेलो और प्रमुख इयान लेसर ने डीडब्ल्यू को बताया कि भले ही अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति कुल मिलाकर यूरोप के धुर-दक्षिणपंथी समूहों का समर्थन करती है। फिर भी, यूरोपीय संगठनों को यह अच्छी तरह सोचना होगा कि वे यूरोप में नापसंद किए जाने वाले अमेरिकी प्रशासन के कितने करीब जाना चाहते हैं।
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