कोरोना से मौत के आंकड़ों में उलझी बिहार सरकार

DW| Last Updated: शुक्रवार, 11 जून 2021 (08:23 IST)
रिपोर्ट : मनीष कुमार

अपने ही आंकड़ों को संशोधित कर कोरोना से मौत के मामले में अब देश में 12वें स्थान पर आ गया है। नए आंकड़ों के सामने आने के बाद कोरोना से होने वाली मौतों का रिकॉर्ड रखने पर सियासी बहस छिड़ गई है।
आंकड़ों में संशोधन से पहले गलत आंकड़ों के सहारे कोरोना से 0.76 प्रतिशत मौत के साथ बिहार 16वें स्थान पर था। बुधवार को जारी संशोधित आंकड़ों के मुताबिक राज्य में मौत की दर 1.07 फीसदी हो गई है। अब तक यहां कोरोना महामारी से 9375 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पहले 7 जून तक 5424 लोगों की मौत बताई जा रही थी। आंकड़ों में उछाल से इस महामारी के कारण मृत्युदर भी 42.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। राज्य में मौत के आंकड़े में एक दिन में 3951 का इजाफा हो गया। तात्पर्य यह कि 72.84 प्रतिशत मौत से राज्य सरकार अनजान थी।
इसी वजह से बुधवार को भारत पूरे विश्व में एक दिन में सर्वाधिक मौतों वाला देश बन गया। इस दिन देशभर में 6139 लोगों की मौत हुई जिनमें सबसे ज्यादा 3951 बिहार से थी। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान अधिक लोगों की मौत हुई। मार्च 2020 से मार्च 2021 के बीच 1600 लोगों की जान गई थी, जबकि मार्च 2021 के बाद से इस साल 8 जून तक 7775 लोगों की मौत हुई। इस प्रकार कोरोना महामारी ने कुल 9375 लोगों को लील लिया। बुधवार, नौ जून को 20 मौत और 589 नए मामले सामने आए।
आश्रितों को मुआवजे के लिए डेथ ऑडिट

विभागीय अपर मुख्य सचिव के अनुसार दूसरी लहर के दौरान निजी अस्पतालों में अनरजिस्टर्ड डेथ तथा इलाज के लिए ले जाए जाने के दौरान भी कई लोगों की मौत की सूचना मिल रही थी। इसलिए राज्य सरकार ने सभी जिलों में डेथ ऑडिट कराने का निर्णय किया और इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी किया गया। प्रत्यय अमृत कहते हैं, 'कोविड के कारण हुई मौतों की पारदर्शी जांच के लिए यह ऑडिट जरूरी था, ताकि पीड़ितों के आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से बतौर मुआवजा दी जाने वाली 4 लाख की राशि का भुगतान किया जा सके। अब तक 3737 लोगों को यह राशि दी जा चुकी है।' इसी कड़ी में सरकार ने कोविड से मौत के मामलों के सत्यापन के लिए 18 मई को प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज अस्पतालों एवं जिला स्तर पर 3-3 सदस्यीय समिति का गठन किया था।
पिछले महीने पटना हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से कोरोना से मौत के मामलों की सही गिनती को करने को कहा था। मेडिकल कालेज अस्पताल वाली कमेटी में प्राचार्य, अस्पताल के अधीक्षक तथा मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष शामिल थे। वहीं जिला स्तर पर बनाई गई टीम में सिविल सर्जन (सीएस), एक्टिंग चीफ मेडिकल ऑफिसर व सीएस द्वारा तय कि ए गए मेडिकल ऑफिसर को रखा गया था। इन्हें जिला भर में होम आइसोलेशन, कोविड केयर सेंटर, डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर, निजी अस्पतालों व एंबुलेंस या अन्य वाहनों से अस्पताल तक लाने के दौरान हुई मौतों का आकलन करना था। दरअसल, इन्हीं दोनों समितियों द्वारा दी रिपोर्ट को कंपाइल कर अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बुधवार को नए आंकड़ों को सार्वजनिक किया।
उन्होंने कहा कि यह एक अति संवेदनशील मामला है। मौत के मामलों की पुष्टि में कुछ जिलों से लापरवाही की सूचना मिली है, ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिनकी भी मौत कोरोना से हुई है, उनके आश्रितों को मुआवजे की राशि मिलेगी, चाहे इस साल मौत हुई हो या फिर पिछले साल। उन्होंने साफ किया कि यह राशि उन्हें भी मिलेगी जिनकी कोरोना रिपोर्ट मौत के समय निगेटिव थी। वहीं आरटीपीसीआर या रैपिड टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव रहने के बावजूद जिनके चेस्ट सीटी स्कैन में कोरोना था और उनकी मौत हो गई, उस मामले में केंद्र की गाइडलाइन को फॉलो किया जाएगा। पहले बिहार सरकार ने कहा था कि 4 लाख के मुआवजे की राशि उन्हीं के आश्रितों को मिलेगी, मौत के समय जिनकी आरटीपीसीआर की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। इस वजह से मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाली 4 लाख की इस अनुग्रह राशि से काफी लोगों के परिजन वंचित हो जा रहे थे।
पटना में सर्वाधिक मौत, मुजफ्फरपुर दूसरे नंबर पर

संशोधित आंकड़ों के मुताबिक कोरोना से सबसे ज्यादा 2303 लोगों की जान केवल पटना जिले में गई, वहीं मुजफ्फरपुर में 609, नालंदा में 463, बेगूसराय में 454, पूर्वी चंपारण में 425, दरभंगा में 342 तथा मधुबनी जिले में 317 लोगों की मौत हुई। मुंगेर एकमात्र ऐसा जिला है जिसके आंकड़े में कोई बदलाव नहीं देखा गया। पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने ताजा आंकड़े पर कहा, 'विभिन्न स्रोतों जैसे प्राइवेट हॉस्पिटल, श्मशान घाट व पटना नगर निगम के माध्यम से कोरोना से हुई मौतों को वेरिफाई किया गया, इससे ही मृतकों की संख्या में वृद्धि हुई।' जानकार बताते हैं कि मौतों की संख्या अभी भी वास्तविक नहीं है। इसमें खासा इजाफा होने के आसार हैं।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार राजधानी पटना के 3 घाटों पर ही इस वर्ष अप्रैल-मई में 3243 शवों को कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार का आंकड़ा है। जबकि दानापुर घाट, फतुहा घाट तथा ग्रामीण इलाकों के अन्य घाटों पर रिकॉर्ड रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। राजधानी पटना में जब आंकड़े इस तरह छुपाए गए तो बांकी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने 8 जून तक कोरोना से मौत का आंकड़ा जारी कर दिया किंतु वास्तविकता यह है कि पटना के 28 निजी अस्पतालों ने कोरोना मृतकों का आंकड़ा अब तक सरकार को नहीं सौंपा है। इस संबंध में 8 जून को ही सिविल सर्जन विभा कुमारी ने पत्र जारी कर इन अस्पतालों को जनवरी 2021 से अब तक हुई मौत की सूचना 3 दिनों में देने का निर्देश दिया है।
ताजा आंकड़ों पर सियासत भी हुई तेज

बिहार सरकार पर काफी पहले से कोविड मृतकों की संख्या में हेरफेर के आरोप लगते रहे हैं। संशोधित आंकड़ा जारी करने के कारण यह आशंका और भी गहरा गई है। बीते मंगलवार को सरकार ने मृतकों की संख्या 5424 बताई थी जो 24 घंटे के अंदर 9375 हो गई। इसी तरह कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर ठीक होने वालों की संख्या 7,01,234 बताई गई थी जो बुधवार को घटकर 6,98,397 हो गई। कोविड से मौत के आंकड़ों में संशोधन ने राज्य में विपक्ष को सियासी मुद्दा सौंप दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि नीतीश अपना फर्ज भुला बैठे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'बन आंकड़ों का दर्जी, घटा-बढ़ा दिया मनमर्जी, फर्ज भुला नीतीश बने फर्जी, अपार हुई जगहंसाई, फिर भी शर्म न आई।'
वहीं उनके पुत्र व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, 'नीतीश जी, इतना झूठ मत बोलिए और बुलवाइए कि उसके बोझ तले दबने के बाद कभी उठ न पाएं। जब फंसे तो एकदम से एक दिन में 4000 मौतों की संख्या बढ़ा दी।' तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि नीतीश सरकार मौतों का जो आंकड़ा बता रही है उससे 20 गुना अधिक मौतें हुई हैं। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मौत के
आंकड़ों की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा है, 'हाईकोर्ट ने फटकार लगाई तब अब सरकार स्वीकार कर रही है कि पहले के आंकड़े से मौत ज्यादा है।'
और मौत रोकने के लिए एहतियाती कदमों की मांग

भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी से संबंधित एंबुलेंस मामले को उठाने वाले जन अधिकार पार्टी के प्रमुख व पूर्व सांसद पप्पू यादव ने भी ट्वीट कर कहा, 'सरकार बताए, आखिर इतनी मौतें एक दिन में कैसे हुईं। वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल कहते हैं, 'ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में मौतें हुईं हैं। इसका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसकी जांच हमारी पार्टी कर रही है।' इस प्रकरण पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा का कहना है, 'यह ठीक है सरकार ने अपनी गलती सुधारी है, किंतु अभी यह ज्यादा जरूरी है कि सरकार तेजी से टीकाकरण अभियान चलाए। गड़बड़ी की जांच तो बाद में भी हो सकती है। लेकिन लोगों की और अधिक मौत हुई तो यह अच्छी बात नहीं होगी।'
कोविड मौत के ताजा आंकड़े ने यह तो साबित कर ही दिया है कि पहली या दूसरी लहर के दौरान होम आइसोलेशन, कोविड केयर सेंटर व प्राइवेट अस्पताल में कोरोना संक्रमितों की निगरानी का राज्य सरकार का दावा झूठा था। हाईकोर्ट के निर्देश पर ही सही जब सरकार ने अपनी मॉनीटरिंग मैकेनिज्म में सुधार किया तो परिणाम परिवर्तित हो गया। वैसे यह अच्छी बात है कि सरकार अब मौतों के प्रति संवेदनशील हो गई है तथा हर हाल में कोविड पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से निर्णय ले रही है। बहरहाल, अब जो बचे हैं उन्हें बचाए रखने के बारे में सोचना ज्यादा जरूरी है।



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