विश्व कप खिताब में ‘चोकर्स’ का ठप्पा उतारेगी दक्षिण अफ्रीका

पुनः संशोधित सोमवार, 27 मई 2019 (17:56 IST)
नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका की टीम बेहतरीन प्रदर्शन और जबरदस्त टीम संयोजन के बावजूद अहम मौकों पर लय गंवाने के कारण ‘चोकर्स’ के रूप में बदनाम हो चुकी है, लेकिन अपनी मौजूदा फॉर्म की बदौलत इसी सप्ताह शुरू होने जा रहे 12वें आईसीसी का खिताब पहली बार अपने नाम करने की वह प्रबल दावेदार मानी जा रही है।

अफ्रीकी टीम ने 1992 में पहली बार विश्व कप पदार्पण किया था और सेमीफाइनल में जगह बनाई, उसके बाद से वह 1999, 2007 और 2015 में भी अंतिम 4 में पहुंची लेकिन इससे आगे नहीं पहुंच सकी। वर्ष 1996 और 2011 में वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी।

हालांकि फाफ डू प्लेसिस की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका इस बार खिताब की दावेदारों में शामिल है। विश्व कप से पहले अपने अभ्यास मैच में उसने श्रीलंका को 87 रन के बड़े अंतर से पराजित किया था और बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित ओवरों में 7 विकेट पर 338 रन का बड़ा स्कोर भी खड़ा किया।

टीम का दूसरा अभ्यास मैच वेस्टइंडीज से बारिश के कारण रद्द रहा था। लेकिन अपने इस प्रदर्शन की बदौलत उम्मीद है कि वह मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ 30 मई को आईसीसी टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच में पूरे आत्मविश्वास के साथ बराबर की टक्कर के लिए उतरेगी। उसका दूसरा मैच 5 जून को भारत से है।

दक्षिण अफ्रीकी टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की भरमार है जिसमें उसके कप्तान प्लेसिस अपना तीसरा विश्व कप खेलने उतर रहे हैं। वहीं हाशिम अमला का भी यह तीसरा, डेल स्टेन तीसरा, जेपी डुमिनी तीसरा, क्विंटन डी काक का दूसरा, डेविड मिलर दूसरा विश्व कप खेलने उतर रहे हैं। बाकी टीमों की तुलना में चयनकर्ताओं ने इस विश्व कप में अपनी सबसे अनुभवी टीम उतारी है।

प्लेसिस टीम के सबसे निरंतर खिलाड़ियों में शामिल हैं और पिछले कुछ वर्षों में उनका प्रदर्शन बल्ले से कमाल का रहा है। आखिरी 2015 विश्व कप में उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 109 रन की अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली थी जबकि अब तक तीन विश्व कप के 14 मैचों में उन्होंने 539 रन बनाए हैं, इसी प्रदर्शन की इस बार भी अपेक्षा उनसे है। प्लेसिस ने श्रीलंका के खिलाफ अभ्यास मैच में भी 88 रन की कमाल की पारी खेली थी।

अनुभवी अमला को तीन विश्व कप में 15 मैचों का अच्छा अनुभव है और इन आईसीसी मैचों में उन्होंने 639 रन बनाए हैं। पिछले विश्व कप में उन्होंने भी आयरलैंड के खिलाफ 159 रन की अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली थी।

तीसरा विश्व कप खेलने उतर रहे तेज गेंदबाज स्टेन की भी इंग्लिश पिचों पर कड़ी परीक्षा होगी। पिछले कई वर्षों से चोट के कारण खराब फॉर्म से जूझ रहे स्टेन की मौजूदा फॉर्म अच्छी है और टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में होने के कारण उनकी मार्गदर्शक की भी भूमिका रहेगी। भारत में 2011 में हुए विश्व कप में उन्होंने 50 रन पर 5 विकेट का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।

इसके अलावा डुमिनी भी पिछले तीन वर्षों से कमाल की फॉर्म में खेल रहे हैं और अपने तीसरे विश्व कप में उनसे भी बड़ी भूमिका की अपेक्षा है। वर्ष 2011 और 2015 विश्व कप में उन्होंने टीम के लिए 13 मैचों में कुल 388 रन बनाए थे और जिम्बाब्वे के खिलाफ पिछले विश्व कप में नाबाद 115 रन की उनकी पारी सर्वश्रेष्ठ थी।

अनुभवी खिलाड़ियों के साथ साथ दक्षिण अफ्रीकी टीम में कुछेक नए चेहरे भी हैं जो पहली बार विश्व कप में उतर रहे हैं और बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। ओपनर एडेन मारक्रम, रासी वेन डेर डुसेन, आंदिले फेहलुकवायो अपनी टीम की तरफ से पहली बार विश्व कप खेलने उतरेंगे और अपने प्रदर्शन से चौंका सकते हैं।

 

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