72 साल पहले हुई थी पहली मांकड़िंग: जानिए इसका नाम 'माकड़िंग' क्यों रखा गया?

Last Updated: मंगलवार, 26 मार्च 2019 (15:49 IST)
नई दिल्ली। मैच में दूसरे छोर पर खड़ा बल्लेबाज अगर गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटने से पहले क्रीज से बाहर निकल आए तो उसे करने को कहते हैं।
राजस्थान रायल्स के सलामी बल्लेबाज जोस बटलर आईपीएल के इतिहास में ‘मांकड़िग’ के शिकार होने वाले पहले बल्लेबाज बने जब किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान ने यहां मैच के दौरान विवादित ढंग से उन्हें आउट किया। बटलर उस समय 43 गेंद में 69 रन बनाकर खेल रहे थे जब अश्विन ने उन्हें चेतावनी दिए बिना मांकेडिंग से आउट किया।
 
इसके बाद अश्विन के इस व्यवहार की सोशल मीडिया में काफी आलोचला हुई। खासकर पूर्व क्रिकेटरों ने आर अश्विन को आड़े हाथों लिया। इनमें शेन वार्न, इयॉन मोर्गन और डेल स्टेन शामिल हैं। कुछ लोगों के इस पर यह विचार है कि अगर यह खेल भावना के विपरीत है तो यह खेल में शामिल ही क्यों है। 
 
क्या कहता है नियम?
 
मारलिबोन क्रिकेट क्लब के सभी नियमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है। इसके 41.16 निमय के अंदर मांकड़िग का नियम विस्तार से लिखा गया है। इसके अनुसार 
 
( अगर बल्लेबाज नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर है और क्रीज छोड चुका है और गेंदबाज एक्शन ले चुका है तो वह गिल्लियां बिखेर कर उसे रन आउट कर सकता है। ऐसे में यह गेंद नहीं गिनी जाएगी। इस प्रयास में अगर गेंदबाज बल्लेबाज को रन आउट नहीं कर पाता है तो गेंद तुरंत डेड घोषित कर जाएगी।) 
 
2017 में हुआ बदलाव  
साल 2017 में इस नियम में  एमसीसी ने एक और बदलाव किया। पहले बॉलिंग एक्शन शुरु करने के बाद ही गेंदबाज मांकडिंग कर सकता था लेकिन इस साल से गेंदबाजी एक्शन शुरु करने से पहले भी वह बल्लेबाज को रन आउट कर सकता है।
 
ने की थी सबसे पहले मांकड़िग 
 
मांकडिंग शब्द भारतीय गेंदबाज वीनू मांकड के कारनामे के बाद मशहूर हुआ। 13 दिसंबर 1947 को खेले जा रहे एक मैच में उन्होंने बिल ब्राउन को ऐसे ही आउट कर दिया। इसके बाद मांकडिंग शब्द और इस तरीके से आउट करना प्रचलन में आया। हालांकि इस गैर पारंपरिक तरीके से रन आउट करने पर मांकड को काफी आलोचना झेलनी पड़ी। लेकिन सर डॉन ब्रैडमैन ने उनका पक्ष लिया। 

 

और भी पढ़ें :