डॉक्यूमेंट्री की लॉन्च से पहले स्टीव वॉ ने बांधे विराट कोहली के लिए तारीफ के पुल

Last Updated: मंगलवार, 2 मार्च 2021 (08:36 IST)
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मुंबई:भारत का पहला रियल-लाइफ एंटरटेनमेंट स्ट्रीमिंग ऐप, , क्रिकेट के दीवाने प्रशंसकों के देश भारत में "कैप्चरिंग क्रिकेट: स्टीव वॉ, इन इंडिया" नामक डॉक्यूमेंट्री लाया है। ऑस्टेलियन क्रिकेट टीम के स्वर्णिम युग के मुख्य भागीदार, स्टीव ने डाक्यूमेंट्री में भारत देश में क्रिकेट के प्रति जूनून और कभी ना खत्म होने वाले प्रेम को अपनी नज़र के ज़रिये दर्शाया है।

ख्याति प्राप्त भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले द्वारा डाक्यूमेंट्री नैरेट की गयी है। इस डाक्यूमेंट्री का निर्देशन पुरस्कार विजेता डायरेक्टर, नेल मिनचिन ने किया है वहीँ मिथिला गुप्ता ने इसे लिखा है जिसमें भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ एवं ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज एडम गिलक्रिस्ट और पूर्व ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट कप्तान और आईसीसी हॉल ऑफ़ फेम लिसा स्थ लेकर के अतिरिक्त इंटरव्यू को दर्शाया गया है।
डाक्यूमेंट्री की कहानी स्टीव वॉ के 1986 में भारत के पहले दौरे के बाद जन्मी फोटोग्राफी की जुनूनीयत और भारत के क्रिकेट कल्चर के प्रति मनमोहकता के इर्द-गिर्द घूमती है। 30 सालों से ज़्यादा और 100 क्रिकेट यात्राओं के बाद, स्टीव एक नयी चुनौती के लिए वापिस लौटे है और क्रिकेट का असली अर्थ खोजने के साथ लोगों को जोड़ने की इसकी अनूठी कला को समझने की कोशिश कर रहे है और इसके लिए स्टीव ने प्रतिभावान फोटोग्राफर और सलाहकार ट्रेंट पारके और अपने अच्छे दोस्त जेसन ब्रुक्स का साथ थामा और कैमरा हाथ में लेकर भारत देश की यात्रा के लिए निकल पड़े।

भारत के प्रमुख 9 शहरों को इस डाक्यूमेंट्री में दर्शाया गया है और देशवासियों का क्रिकेट को धर्म के समान मानने की भावना को समझाया गया है। इस डाक्यूमेंट्री को स्टीव की यात्रा के कैंडिड और ऑब्ज़र्वेशनल फुटेज का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है जिसमें स्टीव के क्रिकेट के साथ सम्बन्ध को प्राथमिकता दी गयी है और उनके जीवन में भारत के महत्त्व को भी दर्शाया गया है।
भारत में डॉक्यूमेंट्री के लांच पर सम्बोधित करते हुए स्टीव ने कहा, " कैप्चरिंग क्रिकेट मेरे दिल के काफी नज़दीक है क्योंकि यह डॉक्यूमेंट्री क्रिकेट और फोटोग्राफी के प्रति मेरे जूनून को दर्शाती है। 1986 में भारत के पहले दौरे के बाद से मैं यह हमेशा जानने के लिए उत्सुक था कि यहाँ के निवासी क्यों क्रिकेट को त्यौहार का रूप मानते है? हाल ही में ताजमहल, चिन्नास्वामी स्टेडियम, महाराजा लक्ष्मी विलास पैलेस, एचपीसीए स्टेडियम, ओवल मैदान, दिल्ली और कोलकाता के आसपास के स्थानों की मेरी यात्राओं ने मुझे ज़िन्दगी भर के किस्से-कहानियाँ और अविसमरणीय यादें दी हैं। मैं पूरी तरह निश्चिन्त हूं कि भारत में जब क्रिकेट फैंस इस डॉक्यूमेंट्री को देखेंगे तो वो इस यात्रा को अच्छे से महसूस कर पाएंगें।
कोहली आधुनिक युग के हीरो की तरह हैं: वॉ

आस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज स्टीव वॉ का मानना है कि विराट कोहली ‘आधुनिक युग के हीरो’ की तरह हैं जो ‘भारत के नए रवैये’ का प्रतिनिधित्व करते हैं जो कुछ भी असंभव नहीं होने की मानसिकता के साथ सभी चीजों का सामना करने को तैयार हैं।

आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने ‘कैप्चरिंग क्रिकेट: स्टीव वॉ इन इंडिया’ शीर्षक वाली 60 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में कहा कि विरोधी से नहीं डरने के रवैये के लिए प्रशंसक कोहली को पसंद करते हैं।
डिस्कवरी प्लस की इस डॉक्यूमेंट्री के विमोचन के बाद यहां जारी मीडिया विज्ञप्ति में वॉ के हवाले से कहा गया, ‘‘वे कोहली के बारे में यह पसंद करते हैं कि यह भारत के नए रवैये की तरह है, डटे रहिए, किसी से भी नहीं डरिए। सभी चीजों का सामना करिए और कुछ भी हासिल किया जा सकता है और संभव है। वह आधुनिक हीरो की तरह हैं।’’

वॉ ने कहा कि वह हमेशा इस बात से मोहित रहते हैं कि कैसे भारत के लोग क्रिकेट का जश्न मनाते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘क्रिकेट को कैमरे में कैद करना मेरे दिल के काफी करीब है क्योंकि इसमें मेरे दो जुनून आते है, क्रिकेट और फोटोग्राफी।’’
वॉ ने कहा, ‘‘1986 में मेरे पहले भारत दौरे के बाद से मैं हमेशा मोहित रहता था कि कैसे स्थानीय लोग क्रिकेट के खेल का जश्न मनाते हैं।’’वॉ ने कहा कि हाल में धर्मशाला में स्टेडियम और मुंबई में ओवल मैदान की यात्रा ने उन्हें जीवनभर के लिए यादगार लम्हें दिए।

तेंदुलकर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए डॉक्यूमेंट्री में कहा, ‘‘मैंने अपना पूरा स्कूल क्रिकेट इन्हीं मैदानों पर खेला और कभी कभी यह देखना मुश्किल हो जाता था कि कौन किसी टीम के लिए क्षेत्ररक्षण कर रहा है और इसके बाद शॉट खेलने के लिए जगह ढूंढना और अधिक चुनौतीपूर्ण था।’’
द्रविड़ ने कहा कि भारत के युवाओं का मानना है कि वे कुछ भी हासिल कर सकते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘भारत के युवाओं में हमेशा से बुद्धिमत्ता रही है, उनमें हमेशा से क्षमता रही है लेकिन अब उनके समर्थन के लिए व्यवस्था है और उन्हें मौके मिल रहे हैं जिससे कि उनकी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल हो सके।’’



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