भारत की आधी टीम ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम पर भारी, गाली का जवाब जीत से

समय ताम्रकर| Last Updated: मंगलवार, 19 जनवरी 2021 (13:31 IST)
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को मुंह छिपाने की जगह नहीं मिल रही होगी, जिन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरिज के पहले कहा था कि टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलियाई टीम चारों टेस्ट मैचों में धूल चटा देगी। सीरिज का पहले मैच में जब भारतीय टीम 36 रनों पर आउट होकर तंबू में जा बैठी तो लगा कि वॉन का अंदाजा सही बैठेगा। विराट कोहली भी इस टेस्ट के बाद अनुष्का के पास पहुंच गए और इसको लेकर भी खूब ले-दे मची कि कप्तान जहाज छोड़ कर भाग गया।

टीम इंडिया के मेन खिलाड़ी घायल होने लगे। शमी, ईशांत, उमेश, अश्विन को बाहर बैठना पड़ा। पंत, साहा जैसे आधे-अधूरे खिलाड़ियों के खेले। हालत ये हो गई थी कि टी. नटराजन, जिसे प्रैक्टिस गेंदबाज के बतौर ऑस्ट्रेलिया में रोका गया था उसे खिलाना पड़ा। मजाक तो ये चल पड़ा था कि 11 खिलाड़ी फिट नहीं हुए तो रवि शास्त्री को खिलाना नहीं पड़ जाए।

लेकिन, सलाम शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, वाशिंगटन सुंदर, नवदीप सैनी जैसे खिलाड़ियों को जिन्होंने सीनियर खिलाड़ियों की कमी नहीं महसूस होने दी। बड़बोले ऑस्ट्रेलियाइयों के दबाव में नहीं आए।
दर्शकों की गाली का जवाब अपने खेल से दिया। किस-किस को श्रेय दिया जाए। नए कप्तान आजिंक्य रहाणे को जिन्होंने 36 रनों पर सिमटी टीम को पाताल से निकाल आकाश तक पहुंचा दिया। युवा शुभमन गिल को, जिसने ऑस्ट्रेलिया तेज पिचों पर तेज गेंदबाजों को बखूबी झेला, ऋषभ पंत को जिसने ऑस्ट्रेलिया खेमे को हमेशा दबाव में लाया, सिराज-नटराजन-ठाकुर-सुंदर जैसे युवा गेंदबाजों को जिन्होंने स्मिथ-वॉर्नर जैसे बल्लेबाजों को चैन की नींद नहीं सोने दिया। पूरी टीम ने विपरीत हालातों में यू-टर्न लेते हुए हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया।

यह जीत इसलिए भी अहम हो जाती है कि हम अधूरी टीम से खेले। यह जीत इसलिए भी अहम हो जाती है कि इस बार वॉर्नर और स्मिथ जैसे धुरंधर भी ऑस्ट्रेलिया में शामिल थे। यह जीत इसलिए भी अहम हो जाती है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने हमारे खिलाड़ियों को गाली बकी, यह जीत इसलिए भी अहम हो जाती है कि दर्शकों ने भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार किया। इन सब बातों का मुंह तोड़ जवाब केवल और केवल जीत से ही दिया जाता था और इन युवा खिलाड़ियों ने सीरिज को 2-1 से अपने नाम किया। लगातार दूसरी बार ऑस्ट्रेलियाइयों को उनके घर में घुस कर मात दी।

सलाम तो राहुल द्रविड़ का भी बनता है। माइक पहन कर राय देने के बजाय उन्होंने मैदान संभाला। युवाओं के बीच पसीना बहाया। उन्हें खेल की बारीकियां सिखाने का कठिन काम किया। बैंच स्ट्रैंथ इतनी मजबूत कर दी कि जब हमारे खास खिलाड़ी बाहर हो गए तो उनकी कमी महसूस नहीं हुई। बैंच पर बैठे खिलाड़ी ही धुरंधरों को धूल चटा आए।

हंसी तो वॉन जैसे कुछ दिग्गजों पर आ रही है जो मन में आया उसे बके जा रहे थे। उन्हें टीम इंडिया ने जवाब दे दिया है कि टीम इंडिया तो छोड़ो बैंच स्ट्रैंथ को भी अंडरएस्टीमेट करने का नहीं।



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