तुला राशि वालों के लिए सलाह

अक्षर तालिका : रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते।
राशि विशेषता : संगीत, गायन, कला, विलासिता, संतुलन और चिकित्सा

तुला राशि (Libra) का स्थान मूत्राशय में होता है। इसके कारक ग्रह बुध, शुक्र और शनि माने गए हैं। वायु तत्व प्रधान तुला राशि का स्वामी शुक्र है। भाग चर है और तुला लग्न की बाधक राशि सिंह तथा बाधक ग्रह सूर्य है, लेकिन अनुसार शत्रु और मित्र ग्रहों का निर्णय कुंडली अनुसार ही होता है।

लाल किताब अनुसार सातवें भाव में तुला राशि मानी गई है जिसके शुक्र का पक्का घर भी सात ही माना जाता है। लाल किताब की कुंडली अनुसार शुक्र के खराब या अच्छा होने की कई स्थितियाँ हैं। यदि आप तुला राशि के जातक हैं तो आपके लिए यहाँ लाल किताब अनुसार सामान्य सलाह दी जा रही है।


अशुभ की निशानी : शुक्र के साथ राहु का होना अर्थात स्त्री तथा दौलत का असर खत्म। यदि शनि मंदा अर्थात नीच का हो तब भी शुक्र का बुरा असर होता है। इसके अलावा भी ऐसी कई स्थितियाँ हैं जिससे शुक्र को मंदा माना गया है। अँगूठे में दर्द का रहना या बिना रोग के ही अँगूठा बेकार हो जाता है। त्वचा में विकार। गुप्त रोग। पत्नी से अनावश्यक कलह आदि।

सावधानी व : लक्ष्मी की उपासना करें। सफेद वस्त्र दान करें। भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे, और कुत्ते को दें। शुक्रवार का व्रत रखें। खटाई न खाएँ। दो मोती लेकर एक पानी में बहा दें और एक अपने पास रखें। स्वयं को और घर को साफ-सुथरा रखें और हमेशा साफ कपड़े पहनें। नित्य नहाएँ। शरीर को जरा भी गंदा न रखें। सुगन्धित इत्र या सेंट का उपयोग करें। पवित्र बने रहें।



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