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मित्रता दिवस पर पढ़ें रोचक कहानी : सच्चे मित्र की परख

शनिवार,जुलाई 31, 2021
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एक बकरी थी। वो बहुत मिलनसार थी। बहुत सारी बकरियां उसकी सहेलियां थीं। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।
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हिन्दी बाल कहानियों का उदय भारतेंदु युग से माना जाता है। इस काल की अधिकांश कहानियां अनूदित हैं। इसके लिए वे संस्कृत की कहानियों के लिए आभारी हैं। सर्वप्रथम शिवप्रसाद सितारे हिन्द ने कुछ मौलिक कहानियां लिखीं। इनमें ‘राजा भोज का सपना’ ‘बच्चों का इनाम’ ...
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वेदों का सार हैं उपनिषद। उपनिषद का सार है गीता। उपनिषद वेदों के अंतिम भाग हैं अतः इन्हें वेदांत भी कहते हैं। उपनिषदों में कई रोचक और शिक्षाप्रद कहानियां हैं जिनका संबंध हमारे जीवन से हैं। हालांकि उपनिषद की सच्ची कहानियां तो हमें उपनिषदों में ही ...
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बच्चों का मानसिक विकास कहानियां, चित्रकथाएं पढ़ने और पहेलियां सुलझाने के साथ ही माता-पिता और शिक्षकों से बेझिझक बातचीत करने से बढ़ता है। पंचतंत्र, जातक कथा, बाल कहानी संग्रह, उपनिषद की कहानियां, हितोपदेश, वेताल पच्चीसी, सिंहासन बत्तीसी, तेनालीराम की ...
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बच्चों का मानसिक विकास कहानियां, चित्रकथाएं पढ़ने और पहेलियां सुलझाने के साथ ही माता-पिता और शिक्षकों से बेझिझक बातचीत करने से बढ़ता है। भारत में प्राचीनकाल से ही बच्चों के लिए कथा और कहानियों की कई पुस्तक लिखी गई। उन्हीं में से ऐक है हितोपदेश। आओ ...
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गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में भाई घनैया जी सेवा करते थे। भाई घनैया जी बहुत निर्मल स्वभाव के थे और गुरु घर में बहुत ही प्यार से सेवा करते थे।
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एक बार तो महक के मन में यही आया कि वह प्रतियोगिता में भाग न ले। कक्षाध्यापिका के पास जाकर अपना लिखा हुआ नाम कटवा दे। कोई बहाना बना देगी कि उस दिन जरूरी काम से बाहर जाना है।
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गांव में एक किसान रहता था जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का काम करता था.. एक दिन बीवी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया वो उसे बेचने के लिए अपने गांव से शहर की तरफ रवाना हुआ...
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हकीम लुकमान का जन्म 1100 ईसा पूर्व हुआ था । वे भारत के आयुर्वेद चिकित्सक चरक के समकालीन थे । कहा जाता है कि वे पेड़ पौधों से भी बातें करते थे । पेड़ पौधे स्वंय अपने औषधीय गुणों से उन्हें वाकिफ कराते थे । पूरे अरब में उनके जैसा कोई चिकित्सक नहीं था।
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’दादाजी, मैं साइकिल चलाना नहीं सीखूंगी।’ दादाजी ने अखबार से चेहरा निकालते हुए पूछा, ’क्यों? गिर पड़ी क्या?’ मैंने अपने सही-सलामत कोहनी और घुटने दिखाते हुए कहा, ’नहीं तो! मैं कहां गिरी? ये देख लो।’
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महाभारत के प्रथम अध्याय में उल्लेख है कि वेद व्यास ने श्री गणेश जी को इसे लिखने का प्रस्ताव दिया तो वे तैयार हो गए। उन्होंने लिखने के पहले शर्त रखी कि महर्षि कथा लिखवाते समय एक पल के लिए भी नहीं रुकेंगे।
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यह कथा हमने भी बचपन से सुनी है....आइए रस लेते हैं इस प्रेरक कथा का.... पहले एक पहेली है....जरा ध्यान दें
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गौतम बुद्ध को कौन नहीं जानता। यहां पढ़ें उनके जीवन से जुड़ी रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानियां-
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अगले मंगलवार को हनुमानजी को भोग लगाकर ही भोजन करूंगी। अंजलि ने भूखी-प्यासी रहकर 7वें दिन मंगलवार को हनुमानजी की पूजा की और उन्हें भोग लगाया
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Motivational story : निडर शिवाजी

मंगलवार,मार्च 30, 2021
शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी था। वह अक्सर युद्ध लड़ने के लिए घर से दूर रहते थे। इसलिए उन्हें शिवाजी के निडर और पराक्रमी होने का अधिक ज्ञान नहीं था।
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होली का त्योहार पास में आया तो पोंगा पंडित ने मुहल्ले के लड़कों को चुनौती दी, 'मैं इस बार भी होली नहीं खेलूंगा। आज तक कोई मुझे रंग नहीं डाल सका। आगे भी किसी में इतनी हिम्मत
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Inspirational story : भगवान और भक्त

सोमवार,मार्च 15, 2021
यह कैसा पुजारी है, जो खुद चखकर भगवान को भोग लगाता है, तो किसी ने कहा- फूल सूंघ कर भगवान के चरणों में अर्पित करता है।
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यह घटना उन दिनों की है, जब सत्येन्द्रनाथ बोस जब एम.एस.सी. में पढ़ रहे थे। गणित के प्रश्न में सर आशुतोष मुखर्जी ने एक कठिन सवाल रख दिया। इस सवाल को किसी विद्यार्थी ने हल नहीं किया।
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बाल कहानी : बेईमानी की सजा

सोमवार,फ़रवरी 1, 2021
किसी नगर में एक पुरोहित था। वह लोगों की धरोहर वापस नहीं देता था। एक बार एक गरीब आदमी उसके घर धरोहर रखकर परदेश चला गया।
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