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Indian Mythological Stories : Fathers Day पर पढ़ें पौराणिक कथाओं में वर्णित पितृ प्रेम की कहानियां

शुक्रवार,जून 19, 2020
Fathers Day Stories
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युद्ध के मैदान में मुगलों के छक्के छुड़ाने में पाइंदे खां की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। गुरु हरगोविंद सिंह जी को अपने साथी पाइंदे खां पर खुद से ज्यादा भरोसा था।
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साड़ी एक गई, मैं दूसरी बना दूंगा। पर तुम्हारी ज़िन्दगी एक बार अहंकार में नष्ट हो गई तो दूसरी कहां से लाओगे तुम? तुम्हारा पश्चाताप ही मेरे लिए बहुत कीमती है।
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एक बार की बात है कि बनगिरी के घने जंगल में एक हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था।
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यह जो बच्चा अपने स्कूल से आते हुए पिता के साथ ठेले पर जा रहा है इसे देखकर कितनों का दिल पसीजा होगा। हम जो सुख सुविधा संपन्न होकर भी माता-पिता से अनेक शिकायत करते हैं। यह बच्चा तमाम अभावों के बीच रहते हुए अपने पिता के साथ ठेले पर बैठकर तल्लीन होकर ...
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कृष्ण काल में नंदा नाम की एक गाय थी। चारा चरते हुए झुंड से बिछड़ गई और वहां पहुंच गई जहां एक बाघ बैठा था। बाघ गरजते हुए नंदा पर टूट पड़ा। नंदा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसे अपना नन्हा बछड़ा याद आने लगा। उसके आंसुओं की धारा बह निकली।
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शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी था। वह अक्सर युद्ध लड़ने के लिए घर से दूर रहते थे। इसलिए उन्हें शिवाजी के निडर और पराक्रमी होने का अधिक ज्ञान नहीं था।
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जब शिवाजी ने उनके सान्निध्य में रहकर लोगों की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की, तो संत बोले- 'तुम क्षत्रिय हो, राज्यरक्षण और प्रजापालन तुम्हारा धर्म है। यह रघुपति की इच्छा दिखाई देती है।'
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एक छोटी-सी ज्ञान-गोष्ठी में स्वामी दयानंद के कुछ भक्त बैठे थे। उनमें से एक ने कहा- 'स्वामी जी, जो कुछ मैं पूछना चाहता हूं वह आपके निजी जीवन से संबंध रखता है, इसलिए पूछते हुए संकोच हो रहा है।'
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यह एक प्राचीन लोककथा है। ओशो रजनीश ने अपने प्रवचनों में इसे सुनाया था। यह कहानी कई लोगों के अलग अलग तरीके से सुनाई है। यह बहुत ही प्रेरणा देने वाली कहानी है। यदि आप इसे समझ जाते हैं तो यह ज्ञान ही नहीं बहुत अन्य जगहों के लिए भी उपयोगी है। इस कहानी ...
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दुनियभर में युद्ध, संघर्ष, विध्वंस का दौर जारी है। प्राचीनकाल के बड़े-बड़े महल, प्राचीन स्मारक, भव्य और सुंदर मूर्तियां आदि सभी को बनाने में वर्षों लगे थे लेकिन मध्य एशिया से लेकर दक्षिण एशिया में धर्म के नाम पर सबकुछ विध्वंस कर दिया गया। आज भी यह ...
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यह एक प्रतीकात्‍मक कहानी है उन लोगों के लिए जो अपने जीवन में किसी प्रकार से कोई आध्यात्मिक या राष्ट्रीय लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यह उन लोगों के लिए भी समझने वाली बात है कि हम जीवन में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जिससे कार्य और कारण की ऐसी श्रृंखला बनती ...
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एक आदमी को पता चला कि साइबेरिया में जमीन इतनी सस्ती है कि मुफ्त ही मिलती है। उस आदमी में वासना जगी। वह दूसरे दिन ही सब बेच-बाचकर साइबेरिया चला गया।
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यूनान में अनाज और कृषि की एक देवी मानी जाती है, जिसे 'डैमेटर' कहते हैं। किसी समय इस देवी के एक रूपवान लड़की थी, जिसका नाम था फलेरी।
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समय के साथ कुछ बदलाव होने से परंपराएं व त्योहार अधिक दिन तक चलते हैं, पर हमें त्योहार मनाने के वे कारण भी जरूर याद रखने चाहिए, जो कि परंपराओं के साथ स्वयं जुड़े होते हैं।
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एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया। खाने के भी लाले पड़ गए। एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा-
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एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक बाज रहता था। पहाड़ की तराई में बरगद के पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। वह बड़ा चालाक और धूर्त था।
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एक आदमी के घर भगवान और गुरु दोनो पहुंच गये। आदमी बाहर आया और भगवान के चरणों में गिरने लगा। तो भगवान बोले-रुको रुको पहले गुरु के चरणों में जाओ। आखिर ऐसा क्या खास है गुरु में कि भगवान ने आदमी को
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एक शिष्य अपने गुरु से सप्ताह भर की छुट्टी लेकर अपने गांव जा रहा था। तब गांव पैदल ही जाना पड़ता था। जाते समय रास्ते में उसे एक कुआं दिखाई दिया।
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एक बार की बात है, एक बकरी थी। वो बहुत खुशी-खुशी अपने गांव में रहती थी। वो बहुत मिलनसार थी। बहुत सारी बकरियां उसकी सहेलियां थीं। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो सभी से बात कर लेती थी और सभी को अपना दोस्त मान लेती थी।
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