dharma sangrah

ग्रीष्म ऋतु पर मनोरंजक कविता

Updated: मंगलवार, 29 मई 2018 (17:38 IST)
- राजेन्द्र देवधरे 'दर्पण'
 
राम-श्याम
सुबहोशाम
खाते रहते
मीठा आम।
 
बाल-पाल
गए चौपाल
नहीं मिला
तरबूजा लाल।
 
तू जा-तू जा
करती पूजा
खुद ले आई
झट खरबूजा।
 
रानी-बानी
दोऊ सयानी
देती सबको
ठंडा पानी
 
साभार- देवपुत्र

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

अगला लेख