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ग्रीष्म ऋतु पर मनोरंजक कविता

Updated: मंगलवार, 29 मई 2018 (17:38 IST)
- राजेन्द्र देवधरे 'दर्पण'
 
राम-श्याम
सुबहोशाम
खाते रहते
मीठा आम।
 
बाल-पाल
गए चौपाल
नहीं मिला
तरबूजा लाल।
 
तू जा-तू जा
करती पूजा
खुद ले आई
झट खरबूजा।
 
रानी-बानी
दोऊ सयानी
देती सबको
ठंडा पानी
 
साभार- देवपुत्र

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