बाल गीत : पके आम का रस
पके आम का रस पीलो जी,
पके आम का रस।
इक गिलास से अधिक न पीना,
बस जी बस जी बस।
अधिक पी लिया तो हो सकती,
है भारी गड़बड़।
हो सकता है लगे बोलने,
पेट भड़ा भड़- भड़।
पेंच अक्ल के ढीले हैं तो,
कस देता है रस।
रस का स्वाद बड़ा अलबेला ,
देता बड़ा सुकून।
इसको पीकर हंसते-हंसते ,
कट जाते मई जून।
ताजे रस में बरफ मिलाकर,
पीना जस के तस।
आम दशहरी लंगड़ा चौसा,
हैं मीठे की खान।
मुर्दों में भी इसके रस से,
आ जाती है जान।
इसके पीने दे हट जाती,
है मन की फंगस।
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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512)....
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