dharma sangrah

बाल कविता : आना हो गौरेया...

Updated: गुरुवार, 7 जुलाई 2016 (17:47 IST)
आना हो गौरेया आना, आना मोरे आंगना
भोर के वो उत्सव रोज के मनाना 


 

ओ री गौरेया मैं, जानूं तोरा रूठना 
अब तो मनाऊं आ जा, आ जा मोरी सगुना 
आ जा चहक सुना, लाल को जगाना 
भोर के वो उत्सव...
 
हमने जुलुम किए, बगिया कटाय के 
अपने महल बना, बिरछा कटाय के 
अब तो लगाऊं, तोरे लिए मीठे जामुना 
भोर के वो उत्सव...
 
डालूं मुट्ठी भर दाने, पानी भी पिवाऊंगी 
आटा की गोली धरूं, चांउर जीवाऊंगी 
झुंड-झुंड चूं-चूं, रागिनी सुनाना 
भोर के वो उत्सव...
 
तेरे नन्हे लाड़लों को, दूर से ही देखूंगी 
चोंच में दाना खिला, नाहीं तोहे टोकूंगी 
चोंच से चोंच मिला, प्रेम सरसाना 
भोर के वो उत्सव..। 
 
लेखक के बारे में
डॉ. सुधा गुप्ता 'अमृता'
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

अगला लेख