Hanuman Chalisa

बाल कविता : पिता

Updated: गुरुवार, 6 नवंबर 2014 (16:49 IST)
जब-जब डिगे पैर तुम्हारे,
हाथ पकड़कर दिया सहारा।
पहुंचाने को तुम्हें किनारे,
त्याग दिया निज जीवन सारा।
 
खुद न खाकर तुम्हें भरोसा,
समझ तुम्हें ही अपनी धन-संपत्ति।
हर दम प्यार से पाला-पोसा,
चाहे आए कष्ट या विपत्ति।
 
सफल विकास किया तुम्हारा,
अपने आशीर्वाद की छाया तले।
जिसने अपनी सारी जिंदगी दे दी,
तुम्हारी एक नन्हीं हंसी के बदले।
 
जब उन्होंने भले के लिए तुम्हें डांट दिया था,
तुमसे ज्यादा दु:ख तब उनके दिल में हुआ था।
आस है उनकी सुखी जीवन हो तुम्हारा,
बुढ़ापे की लाठी बन दो उन्हें सहारा।
 
उन्होंने तुम्हें जीवन दिया है,
उनका कभी न दिल तोड़ना।
तुम्हारी उन्हें जब आवश्यकता हो,
उनसे कभी न मुंह मोड़ना।

साभार- छोटी-सी उमर (कविता संग्रह) 
 
लेखक के बारे में
अंशुमन दुबे (बाल कवि)
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती पर बॉलीवुड के 25 सदाबहार गाने, हर दोस्त को आएंगे पसंद

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती कब बदल जाती है प्यार में? जानिए 7 बड़े संकेत

खूब खाइए कि आप लखनऊ में हैं...

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्त कितने प्रकार के होते हैं? जानिए किन दोस्तों से रहना चाहिए सतर्क