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रिमझिम बारिश पर कविता : बादल

Updated: बुधवार, 20 जुलाई 2016 (16:59 IST)
- ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश' 


 

 
पानी लेकर बादल आए,
आसमान पर जमकर छाए।
 
रिमझिम-रिमझिम बरसेंगे, 
गढ़-गढ़कर बादल गाए।
 
पेड़, पौधे, वृक्ष जहां मिलेंगे 
वहां बरसे, बादल इतराए।
 
मन मयूर सबका नाचे
बादल भी नाचे, शरमाए।
 
जल ही तो जीवन है 
जीवन अपना खूब लुटाए।
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