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बाल कविता : बच्चे फिर स्कूल चले

Updated: सोमवार, 18 जुलाई 2016 (12:52 IST)
- डॉ. हरीश निगम
 

 
सैर-सपाटे भूल चले, 
बच्चे फिर स्कूल चले।
 
छुट्टी वाले
दिन खर्चे
शुरू पढ़ाई
के चर्चे
 
आलस पर दे धूल चले,
बच्चे फिर स्कूल चले।
 
कक्षा नई
नए बस्ते
नन्हे-मुन्ने
गुलदस्ते
हंसते-गाते फूल चले, 
बच्चे फिर स्कूल चले।
 
रंगों का
रेला बच्चे
खुशियों का
मेला बच्चे
तन-मन झूला झूल चले,
बच्चे फिर स्कूल चले।
 
साभार- devputra 
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