Hanuman Chalisa
✕

हिन्दी कविता : जीता रहूंगा...

Updated: सोमवार, 17 अप्रैल 2017 (17:03 IST)
क्या हुआ सब जा चुके हैं
बच्चे अपना घर बना चुके हैं
जीवन के इस सफर में
अकेला हूं अपने घर में
जीवन के इस उपवन में
खिलता रहूंगा, खिलता रहूंगा।
 
जीवन में सब कुछ पाया
छोड़कर सब मोह-माया
अपने अनुभवों की कीमत
नहीं रखूंगा खुद तक सीमित
मानवता के हितार्थ काम
करता रहूंगा करता रहूंगा।
 
सांसों की गिनती कम हो रही है
मृत्यु जीवन की ओर बढ़ रही है
सभी अपने पराये से लग रहे हैं
दिन में सोए पल रात में जग रहे हैं
जितने भी पल बचे हैं जिंदगी के
जीता रहूंगा जीता रहूंगा।
 
बुढ़ापा नैराश्य का पर्याय नहीं है
जीवन इतना असहाय नहीं है
माना कि तन मजबूर है
माना कि मंजिल दूर है
फिर भी बिना किसी के सहारे
चलता रहूंगा, चलता रहूंगा।
 
हे ईश्वर बोझ न बनूं किसी पर
रहूं अपने सहारे इस जमीं पर
किंचित अभिमान न रहे मन में
स्वाभिमान जिंदा रहे इस तन में
अंतिम समय ये मुख तेरा ही नाम
रटता रहे, रटता रहे।
 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

अयोध्या दीपोत्सव: आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का पर्वोत्कर्ष

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से बढ़ सकती हैं स्वस्थ जीवन की संभावनाएं

भारत के लिए ट्रम्प से ज्यादा खतरनाक है डेमोक्रेट्स!

'रसगुल्लों पर चर्चा'

अगला लेख