dharma sangrah

नन्ही कविता : हरी-भरी है प्यारी दूब

Updated: शनिवार, 9 जुलाई 2016 (16:05 IST)
हरी-भरी है प्यारी दूब
सबके मन को भाती दूब
आंखों को ठंडाई देती
हमें निकट बुलाती दूब ...1
पैरों नीचे जब यह आती
बड़ी मुलायम लगती दूब
झुक जाती चलते कदमों पर
कदम उठे उठ जाती दूब ...2
 
पानी जब गिरता वर्षा में
धरती पर छा जाती दूब
सुबह-सुबह ओस बूंद से
रोज नहाती दूब ...3
 
कभी घिरे हो सभी और से
नहीं लड़ो सिखलाती दूब
झुककर जीवित रहना सीखें
ऐसा पाठ पढ़ाती दूब ...4
 
लेखक के बारे में
कृष्ण वल्लभ पौराणिक
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

अगला लेख