sundarkand

जन्माष्टमी पर कविता : ब्रज दर्शन की रेल...

Updated: सोमवार, 14 अगस्त 2017 (14:13 IST)
- डॉ. सरोजिनी कुलश्रेष्ठ
 
चलती ब्रज दर्शन की रेल
राधारानी नाम है इसका
चलती रेलमपेल।
 
यह गोकुल है, लीला जिसमें
करते थे नंदलाला
मटकी फोड़ दही बिखराते
हंसती थी ब्रजबाला
ऐसे ही करते रहते थे
नटखटपट के खेल
चलती ब्रज दर्शन की रेल।
 
जहां विराजी राधारानी
नाम गांव बरसाना
नंदगांव भी यहीं पास
था रहना आना-जाना
ब्रज की धरती प्रेमभरी है
राधा-माधव मेल
चलती ब्रज दर्शन की रेल।
 
कैसे सुंदर हैं ब्रज के वन
लो वृन्दावन आया
ऐसा लगता वेणु बजाता
कान्हा भू पर आया
रंभा-रंभाकर लोट रही हैं
गउएं ठेलमठेल
चलती ब्रज दर्शन की रेल।
 
एक से एक अनोखे देखो
मंदिर वृन्दावन के
रंगबिहारीजी, गोविंदजी
कान्हा ठाकुर सबके
राधा वृन्दावनेश्वरी है
कृष्ण-कन्हैया छैल
चलती ब्रज दर्शन की रेल।
 
छुक-छुक रेल चली आगे को
बहती जमुना मैया
बसी इसी तट पर मथुरा
जन्मे जहां कन्हैया
कंस मार दु:ख दूर किया था
अवतारी के खेल
चलती ब्रज दर्शन की रेल।

साभार - देवपुत्र 
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

अगला लेख