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Sunderkand: जीवन में हार का सामना हो, तो सुंदरकांड की इन 5 चौपाइयों का लें सहारा

In the picture, a devotee is reciting the Sundarkand in front of a statue of Lord Hanuman.
Sunderkand: यदि मन में किसी भी प्रकार का भय, संदेह, चिंता, नकारात्मकता, अशांति, बैचेनी, आत्मविश्वास की कमी है तो सुंदरकांड की मात्र 5 चौपाइयों का नियमित पाठ करें। सभी तरह के संकट समाप्त होकर मन में  साहस, शांति और विश्वास जागृत होगा। श्रीराम जी के साथ ही हनुमानजी की कृपा प्राप्त होगी। चलिए जानते हैं कि कौनसी हैं वे चौपाइयां। 
 
संपूर्ण सुंदरकांड का पाठ करने के लिए आगे की लिंक पर क्लिक करें:- || सुंदरकाण्ड ||
 

1. पहली चौपाई:

कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहि होई तात तुम पाहीं।।
अर्थ: जगत्‌ में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके।  
भावार्थ: हे हनुमान जी! इस संसार में ऐसा कोई भी काम नहीं है जो आपके लिए बहुत कठिन या असंभव हो।
प्रभाव: आपके मन में जब यह भाव आए कि यह काम तो अब मुझसे नहीं होगा, तब इस चौपाई का जाप करें। यह आपके मन में आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और संदेह को मिटाएगी।
 

2. दूसरी चौपाई

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा।।
हृदय राखि कोसलपुर राजा।।
अर्थ: अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए। 
भावार्थ: यह चौपाई हनुमानजी के लंका प्रवेश के समय की है, जो आत्मविश्वास और ईश्वर पर विश्वास का प्रतीक है। 
प्रभाव: इसे यात्रा पर जाने, नया काम शुरू करने या किसी भी बड़ी चुनौती का सामना करने से पहले स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

3. तीसरी चौपाई

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥
अर्थ: हनुमान्‌जी ने उसे (मैनाक पर्वत को) हाथ से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा- भाई! श्री रामचंद्रजी का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?॥
भावार्थ: प्रभु श्रीराम का कार्य (सीता माता की खोज) पूरा किए बिना मुझे विश्राम (आराम) करने का अधिकार कहां है।
प्रभाव: यह पंक्ति सिखाती है कि जब तक व्यक्ति का मुख्य लक्ष्य (कर्तव्य) पूरा न हो जाए, तब तक आराम या विश्राम नहीं करना चाहिए।
 

4. चौथी चौपाई

दीन दयाल बिरिदु संभारी 
हरहु नाथ मम संकट भारी।
अर्थ: दीनों (दुःखियों) पर दया करना आपका विरद है (और मैं दीन हूँ) अतः उस विरद को याद करके, हे नाथ! मेरे भारी संकट को दूर कीजिए॥
भावार्थ: यह भगवान श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी कृपा से संकट से मुक्ति की प्रार्थना है।
प्रभाव: यह चौपाई सुबह उठकर या किसी भी प्रकार की विपत्ति में भगवान का ध्यान करते हुए की जाती है।
 

5. पांचवीं चौपाई

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।
गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
अर्थ: उसके लिए (रामभक्त के लिए) विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है॥
भावार्थ: यह प्रसंग तब का है जब हनुमान जी लंका में प्रवेश करने से पहले सीता माता को खोजने के लिए राम का जप करते हुए जा रहे थे। जब ईश्वर की कृपा और विश्वास साथ हो, तो हर प्रकार की विषम परिस्थिति अनुकूल हो जाती है। 
प्रभाव: इस चौपाई के प्रभाव से आपका घोर शत्रु भी आपका मित्र बन जाएगा और वह सपने में भी आपका अहित नहीं सोचेगा।
 

सुंदरकांड पाठ के प्रमुख फायदे:

1. मानसिक शांति और भय से मुक्ति: 'कपि सुनु कहुँ सुगुन बिसाला, कछु नहिं मोहि कहँ जग भय साला' चौपाई का पाठ करने से भय, चिंता और अनहोनी का डर दूर होता है।
 
2. शत्रु पर विजय: 'रामचंद्र गुन बरनैं लागा, सुनतहिं सीता कर दुख भागा' का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
 
3. कर्ज से मुक्ति और धन-समृद्धि: शनिवार के दिन विशेष रूप से सुंदरकांड का पाठ करने से शनि दोष दूर होता है और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
 
4. आत्मविश्वास और मनोबल में वृद्धि: यह पाठ भक्त में वीरता और निर्भीकता का संचार करता है, जिससे बड़ी से बड़ी चुनौती को पार करने की शक्ति मिलती है।
 
5. घर में सुख-शांति: नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करने से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और पारिवारिक कलह दूर होती है।
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WD Feature Desk
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