dharma sangrah

हनुमान जी की पूजा करते हैं तो यह आलेख जरूर पढ़ें,(10 सावधानियां)

Updated: मंगलवार, 26 मई 2020 (08:30 IST)
हनुमान जी की आराधना से ग्रहों का दोष शांत हो जाता है। हनुमान जी और सूर्यदेव एक दूसरे के स्वरूप हैं, इनकी परस्पर मैत्री अति प्रबल मानी गई है। इसलिए हनुमान साधना करने वाले साधकों में सूर्य तत्व अर्थात आत्मविश्वास, ओज, तेजस्विता आदि स्वत: ही आ जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें यह 10 बातें...
 
 
* हनुमान साधना में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है।
 
*  प्रसाद शुद्ध घी का बना होना चाहिए।
 
*  हनुमान जी को तिल के तेल में मिले हुए सिंदूर का लेपन करना चाहिए।
 
* हनुमान जी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन लगाना चाहिए।
 
* पुष्पों में लाल, पीले बड़े फूल अर्पित करने चाहिए। कमल, गेंदे, सूर्यमुखी के फूल अर्पित करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
 
*  नैवेद्य में प्रातः पूजन में गुड़, नारियल का गोला और लड्डू, दोपहर में गुड़, घी और गेहूं की रोटी का चूरमा  अर्पित करना चाहिए। रात्रि में आम, अमरूद, केला आदि फलों का प्रसाद अर्पित करें।
 
* साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अति अनिवार्य है।
 
* जो नैवेद्य हनुमान जी को अर्पित किया जाता है उसे साधक को ग्रहण करना चाहिए।
 
* मंत्र जप बोलकर किए जा सकते हैं। हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष उनके नेत्रों की ओर देखते हुए मंत्रों के जप करें।
 
* साधना में दो प्रकार की मालाओं का प्रयोग किया जाता है। सात्विक कार्य से संबंधित साधना में रुद्राक्ष माला तथा तामसी एवं पराक्रमी कार्यों के लिए मूंगे की माला।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 08 अगस्‍त 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

शुक्र का हस्त नक्षत्र में गोचर: जानिए मेष से मीन तक 12 राशियों पर क्या होगा असर

कांवड़ यात्रा 2026: किस पेड़ के नीचे से गुजरने पर कांवड़ मानी जाती है खंडित? जानिए धार्मिक मान्यता

हरतालिका तीज 2026: सिंधारा दोज से होती है व्रत की शुरुआत, जानिए इसका धार्मिक महत्व

श्रावण मास विशेष: शिवलिंग पर कितने प्रकार के अभिषेक किए जाते हैं? जानिए हर अभिषेक का महत्व

अगला लेख