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Ramzan month | आया सिवइयों का त्योहार

फिजाँ में घुल रहा सौहार्द का रंग

रमजान माह
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पूरी दुनिया में इन दिनों चारों ओर त्योहारों के रंग में डूबा हुआ है। अभी जन्माष्टमी का उत्साह समाप्त भी नहीं हुआ कि रमजान माह के आखिरी अशरे ने फिजाँ में भाईचारे का संदेश घोल दिया। रमजान माह की समाप्ति पर मनाए जाने वाले ईदुल फितर की आहट से बाजार सिवइया व शीर-खुरमे से सजने लगे हैं।

ईदुल फितर का त्योहार नजदीक आते ही हर बाशिंदे के मन में सिवइयाँ का मीठा स्वाद एक अलग ही अहसास भर देता है। ऐसा ही अहसास शहर के बाजारों में सिवइयाँ और शीर-खुरमे को देखकर उठ रहा है। इन दिनों सिवइयाँ बनाने का कार्य कारीगरों द्वारा तेजी से किया जा रहा है। कहीं घर में ही रवा गूँथकर अपने रिश्तेदारों के लिए सिवइयाँ बनाई जा रही है तो बाजार में मशीन के माध्यम से सिवइयाँ का उत्पादन हो रहा है।

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इमली की लकड़ी पर रवे का आटा गूँथकर सिवइयाँ के लंबे तार तैयार किए जाते हैं। सूखने पर सिवइयाँ को गिरा दिया जाता है। इसके बाद इसे भट्टी में पकाया जाता है। तब जाकर सिवइयाँ बनने की प्रक्रिया पूर्ण होती है।

दूसरी तरफ विशेष तौर पर मैदे का घोल तैयार किया जाता है। मशीन की सहायता से करीब डेढ़ फुट लंबी सिवइयाँ तैयार की जाती है। सिवइयाँ तैयार हो जाने के बाद इसे बाँस की बल्लियाँ बाँधकर सुखाया जाता है। सूखने पर भट्टी में गर्म करने के बाद इनके रंग में परिवर्तन होने लगता है।

ईद पर सिवइयाँ बनाना अच्छा लगता है। कई हिन्दू धर्मावलंबी व मित्र ईद की बधाई देने आते हैं। सिवइयाँ का स्वाद इन लोगों के दिलों में अपार स्नेह घोल देता है। ईद पर सिवइयाँ के साथ शीर-खुरमे का स्वाद सभी के मन में प्रेम का रस घोल देता है।