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इस्लाम के संस्थापक पैगंबर हज़रत साहब का जन्मदिन

Updated: सोमवार, 12 दिसंबर 2016 (11:32 IST)
'ला इलाह इल्लाला, मोहम्मद रसुल्लाह'
 
भावार्थ : अल्लाह सिर्फ एक है, दूसरा कोई नहीं। मोहम्मद साहब उसके सच्चे रसूल हैं।


 
पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ही इस्लाम धर्म की स्‍थापना की है। आप हज़रत सल्ल. इस्लाम के आखिरी नबी हैं, आपके बाद अब कयामत तक कोई नबी नहीं आने वाला।
 
जबकि अरब में कबीलाई संस्कृति का जाहिलाना दौर था। हर कबीले का अपना अलग धर्म था और उनके देवी-देवता भी अलग ही थे। कोई मूर्तिपूजक था तो कोई आग को पूजता था। यहुदियों और ईसाइयों के भी कबीले थे लेकिन वे भी मजहब के बिगाड़ का शिकार थे। ईश्वर (अल्लाह) को छोड़कर लोग व्यक्ति और प्रकृति-पूजा में लगे थे।
 
इस सबके अलावा भी पूरे अरब में हिंसा का बोलबाला था। औरतें और बच्चे महफूज नहीं थे। लोगों के जान-माल की सुरक्षा की कोई ग्यारंटी नहीं थी। सभी ओर बदइंतजामी थी। इस अंधेरे दौर से दुनिया को बाहर निकालने के लिए अल्लाह ने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पैगंबर बनाया।
 
जन्म : इस्लाम के संस्थापक पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्मदिन हिजरी रबीउल अव्वल महीने की 12 तारीख को मनाया जाता है। 571 ईस्वीं को शहर मक्का में पैगंबर साहब हज़रत मुहम्मद सल्ल. का जन्म हुआ था। मक्का सऊदी अरब में स्थित है।
 
आप सल्ल. के वालिद साहब (पिता) का नाम अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ल मुतलिब था और वालिदा (माता) का नाम आमना था। मुहम्मद सल्ल. के पिता का इंतकाल उनके जन्म के 2 माह बाद ही हो गया था। ऐसे में उनका लालन-पालन उनके चाचा अबू तालिब ने किया। आपके चाचा अबू तालिब ने आपका खयाल उनकी जान से भी ज्यादा रखा।
 
इबादत और इलहाम : आप सल्ल. अलै. बचपन से ही अल्लाह की इबादत में लगे रहते थे। आपने कई दिनों तक मक्का की एक पहाड़ी 'अबुलुन नूर' पर इबादत की। 40 वर्ष की अवस्था में आपको अल्लाह की ओर से संदेश (इलहाम) प्राप्त हुआ।
 
अल्लाह ने फरमाया, ये सब संसार सूर्य, चांद, सितारे मैंने पैदा किए हैं। मुझे हमेशा याद करो। मैं केवल एक हूं। मेरा कोई मानी-सानी नहीं। लोगों को समझाओ। हज़रत मोहम्मद सल्ल. अलै. ने ऐसा करने का अल्लाह को वचन दिया, तभी से उन्हें नबूवत प्राप्त हुई।
 
कुरआन : हज़रत मोहम्मद साहब पर जो अल्लाह की पवित्र किताब उतारी गई है, वह है- कुरआन। अल्लाह ने फरिश्तों के सरदार जिब्राइल अलै. के मार्फत पवित्र संदेश (वही) सुनाया। उस संदेश को ही कुरआन में संग्रहीत किया गया है। 1,400 साल हो गए लेकिन कहते हैं कि इस संदेश में जरा भी रद्दोबदल नहीं है।
 
सबसे पहले ईमान : नबूवत मिलने के बाद आप सल्ल. ने लोगों को ईमान की दावत दी। मर्दों में सबसे पहले ईमान लाने वाले सहाबी हज़रत अबूबक्र सिद्दीक रजि. रहे। बच्चों में हज़रत अली रजि. सबसे पहले ईमान लाए और औरतों में हजरत खदीजा रजि. ईमान
लाईं।
 
मोहम्मद सा. का धर्म :  वफात : 632 ईस्वीं, 28 सफर हिजरी सन् 11 को 63 वर्ष की उम्र में हज़रत मुहम्मद सल्ल. ने मदीना में दुनिया से पर्दा कर लिया। उनकी वफात के बाद तक लगभग पूरा अरब इस्लाम के सूत्र में बंध चुका था और आज पूरी दुनिया में उनके बताए तरीके पर जिंदगी गुजारने वाले लोग हैं।
 
संकलन : अनिरुद्ध जोशी 'शतायु' 

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