जैव हथियार संधि पत्र के क्रियान्वयन पर जोर : भारत

संयुक्त राष्ट्र| पुनः संशोधित शनिवार, 25 अक्टूबर 2014 (18:03 IST)
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संयुक्त राष्ट्र। अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे की पृष्ठभूमि में भारत ने जैविक हथियार संधि पत्र को मजबूती से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। आतंकी और गैरसरकारी तत्व जैविक विषाक्त पदार्थों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।
 
निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के लिए भारत के स्थाई प्रतिनिधि डीबी वेंकटेश वर्मा ने कहा कि कहीं भी और किसी के भी तरफ से रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की निंदा होनी चाहिए और रासायनिक हथियारों के प्रयोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। 
 
वे ‘सामूहिक विनाश के अन्य हथियार’ पर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुई चर्चा में भाग ले रहे थे तथा उन्होंने कहा कि भारत जैविक हथियार सम्मेलन के असर को बढ़ाने और इसके क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
 
वर्मा ने कहा कि हमारा मानना है कि आतंकी उद्देश्यों के लिए जैविक विषाक्त पदार्थों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे आतंकी या गैरसरकारी तत्वों के साथ ही प्रसार के रुझान से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए नई चुनौतियों के मद्देनजर यह जरूरी है।
 
उन्होंने कहा कि सामूहिक विनाश के खास तरह के हथियारों की पूरी तरह से समाप्ति के लिए निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में उन्होंने रासायनिक हथियार संधि (सीडब्लूसी) और जैविक हथियार संधि को लेकर भारत की प्रतिबद्धता रेखांकित की।
 
रासायनिक हथियार रोकथाम संगठन (ओपीसीडब्लू) की ओर से भारत में सबसे बड़ा निरीक्षण हो चुका है और भारत में पुष्टि के लिए की जाने वाली जांच का रिकॉर्ड ‘निष्कलंक’ रहा है। (भाषा) 



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