क्या वाकई सच बोलता है चेहरा..?

Last Updated: शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014 (16:01 IST)
पर कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि चेहरे को पढ़ने की प्रक्रिया से व्यक्ति के बारे में राय बना लेने की बात गलत और उतावली से भरी हो सकती है। इस बारे में यूनिवर्सिटी के टेपर स्कूल ऑफ बिजनेस, पैंसिलवानिया के प्रमुख डॉ. क्रिस्टोफर ओलिवोला का कहना है कि हालांकि हम यह सोचते हैं कि हमारे नतीजे और चयन पूरी तरह से विवेकपूर्ण, पक्षपातरहित, सामंजस्य और पूरी तरह से सार्थक जानकारी पर आधारित हों लेकिन तो यह है कि हमारे फैसले अक्सर ही सतही और असंगत कारणों पर आधारित होते हैं।

अक्सर ही हमारे फैसले इन बातों पर आधारित होते हैं। अगर हम गोलाकार चेहरे के साथ बड़ी आंखें, छोटी नाक और ठोड़ी देखते हैं या चेहरा बच्चे जैसा होता है तो हम मानते हैं, व्यक्ति अक्षम है। पर अगर बड़े माथा और परिपक्व चेहरा तथा नाक अच्छी तरह से उभरी हो तो हम इसे सक्षमता की निशानी मानते हैं। इसी तरह चौड़ी आंखें, छोटी नाक और ऊंची भौंहें हों तो हम इन्हें निष्क्रियता की निशानी समझते हैं। पर अगर अलग जॉबोन्स (जबड़े की हड्डियों) के साथ चेहरा मर्दाना हो तो हम इसे प्रभावी होने का प्रतीक मानते हैं।

इन चेहरों के बारे में क्या धारण है आपकी... पढ़ें अगले पेज पर...




और भी पढ़ें :