टोक्यो विकिरण की चपेट में

दहशत और अफरातफरी का माहौल

टोक्यो| भाषा|
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फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से निकले विकिरण की चपेट में राजधानी टोक्यो भी आ गई है, जिससे एक करोड़ 20 लाख की आबादी वाले इस महानगर में दहशत और अफरातफरी फैल गई।


दूसरी ओर फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के दो अन्य रियेक्टरों की शीत प्रणाली भी ठप हो गई जिससे उनमें विस्फोट की आशंका पैदा हो गई है। इस संयंत्र के तीन अन्य रिएक्टरों में पहले ही विस्फोट हो चुका है जिससे निकले विकिरण से बड़ा क्षेत्र प्रभावित हुआ है और बीस किलोमीटर के दायरे का क्षेत्र पूरी तरह खाली करा लिया गया है तथा अगले 10 किलोमीटर तक लोगों को घरों में ही बने रहने का निर्देश दिया गया है।
फुकुशिमा डैची संयंत्र के रियक्टर नंबर दो और रियक्टर नंबर चार में आज सुबह दो हाइड्रोजन विस्फोटों के बाद सरकार को घोषणा करनी पड़ी कि विकिरण खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है।


परमाणु विभीषिका ने आज उस समय खतरनाक रूप ले लिया जब हवा का रुख प्रशांत सागर की बजाय के जमीनी इलाके की ओर हो गया और 250 किलोमीटर स्थित राजधानी के निकट सईतामा इलाके में विकिरण की मात्रा सामान्य से 40 गुना अधिक मापी गई।

टोक्यो स्थित विदेशी राजनयिकों, पत्रकारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों ने देश छोड़कर जाना शुरू कर दिया है। हालाँकि सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया जा रहा है कि विकिरण की मात्रा में कमी आ रही है।

टोक्यो में अफरातफरी : विकिरण फैलने की खबर मिलते ही राजधानी टोक्यो में अफरातफरी फैल गई। कई नागरिक शहर छोड़कर दूसरे नगरों की तरफ जाते देखे गए और शहर में रह गए लोगों ने खाने-पीने का सामान इकठ्ठा करना शुरू कर दियाट शहर की बड़ी दुकानों से टॉर्च, मोमबत्तियाँ, बड़े डिब्बे, सोने में काम आने वाले बड़े बैग का स्टॉक खत्म हो चुका है।
इन्फोसिस ने कर्मचारी बुलाए : शहर मे काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों ने स्वदेश लौटना शुरू कर दिया है। भारत की सॉफ्‍टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस ने भी अपने कर्मचारियों को वापस बुलाने का काम प्रारंभ कर दिया। टोक्यो घूमने आए पर्यटकों ने बड़ी मायूसी के साथ अपना दौरा बीच में ही खत्म कर वापसी की रूपरेखा बनानी शुरू कर दी है।
फिर आया भूकंप : इसी बीच जापान में एक बार फिर आज भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जापान के मौसम विभाग के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता छह थी। इसका केंद्र राजधानी टोक्यो से करीब 120 किलोमीटर दूर शिजुओका में 10 किलोमीटर की गहराई पर था।

संयंत्र संचालक टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी (टेपको) के अनुसार रियक्टर नंबर चार में स्थानीय समयानुनसार करीब नौ बजकर 40 मिनट पर आग लग गई। इसी रिएक्टर में इस्तेमाल हो चुका परमाणु ईंधन संग्रहीत किया गया था। हालाँकि बाद में इस आग को बुझा दिया गया।
रिएक्टर नंबर दो में स्थानीय समयानुसार छह बजकर 10 मिनट पर विस्फोट हुआ जिससे जान पड़ता है कि रेडियोधर्मी पदार्थ को निकलने से रोकने वाली प्रणाली में एक क्षतिग्रस्त हो गया। इससे और गंभीर रेडियोधर्मी लीक होने का खतरा बढ़ गया।

बड़ा खतरा : चितिंत प्रधानमंत्री कान ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि क्षतिग्रस्त हो चुके परमाणु रिएक्टरों से पहले ही काफी रिसाव हो चुका है और आगे भी रिसाव का बहुत बड़ा जोखिम है। कान ने फुकुशिमा संयंत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले करीब एक लाख 40 हजार लोगों से घरों में रहने और बिजली बचाने का आग्रह किया है क्योंकि जापान के इस संकट के चेर्नोबिल जैसी आपदा में बदलने का खतरा उत्पन्न हो गया।
400 गुना अधिक विकिरण : क्योदो ने परमाणु विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि फुकुशिमा के रिएक्टर नंबर तीन के पास साल भर में लोग जितने विकिरण से दो-चार होते हैं अभी उसका कहीं 400 गुना अधिक विकिरण हो रहा है। दूसरे नंबर का क्षतिग्रस्त मालूम पड़ता है। तीसरे नंबर के रिएक्टर में कल विस्फोट हुआ था।
रिएक्टर नंबर एक में शनिवार को हाइड्रोजन विस्फोट होने के बाद 20 किलोमीटर तक के इलाके को खाली करा लिया गया था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि जापान ने विशेषज्ञों की मदद की माँगी थी। संयंत्र के निकट के इलाकों से अधिकारियों ने लगभग 2 लाख 10000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचा दिया गया है।

विकिरण रूस तक पहुँचा : फुकुशिमा के परमाणु संयंत्र में हुए विस्फोट से पैदा परमाणु विकिरण जापान का भूभाग पार करते हुए पड़ोसी देश रूस तक पहुँच गया है तथा रूस के वैज्ञानिकों ने सुदूरपूर्व नगर ब्लादीवोस्टक में परमाणु विकिरण की मात्रा में इजाफा दर्ज किया।
रूस के सुदूरपूर्व में रहने वाले लोगों ने विकिरण के असर को कम करने वाली आयोडीन की गोलियों की अंधाधुंध खरीद शुरू कर दी है, जबकि प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। (एजेंसियाँ)



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