परमाणु रिएक्टरों को ठंडा करने की कोशिशें तेज

फुकुशिमा-टोक्यो| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 18 मार्च 2011 (01:10 IST)
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PTI
में भूकंप और सुनामी के चलते फुकुशिमा स्थित परमाणु संयंत्र क्षतिग्रस्त होने के मद्देनजर परमाणु आपदा को लेकर चिंता बढ़ने के बीच गुरुवार को संयंत्र में उपयोग की हुई ईंधन छड़ों को अधिक गर्म होने से बचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों और दमकल वाहनों से टनों पानी उड़ेला।


इसी बीच अमेरिका के परमाणु नियामक आयोग के अध्यक्ष ग्रेगरी जैको ने चेतावनी दी है कि जापान में क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्र में इस्तेमाल हो चुके ईंधन की छड़ों को ठंडा करने वाले स्थान (पूल) में पानी के करीब करीब पूरी तरह खत्म हो जाने से देश में व्यापक परमाणु संकट की आशंका है।

उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से कहा कि फुकुशिमा परमाणु परिसर में एक पूल से पूरा पानी समाप्त हो चुका है और ऐसे में गंभीर आपदा आसन्न है। उन्होंने कहा कि परमाणु बादल अमेरिका और अन्य देशों के लिए खतरे की घंटी है।

उन्होंने कहा कि प्रयुक्त ईंधन (ठंडा करने वाले) पूल में पानी नहीं बचा है और हमें आशंका है कि स्तर बहुत ऊँचा है जो सुधारात्मक कदम उठाने की क्षमता पर गंभीर असर डाल सकता है।


जापानी सेना के दो सीएच-47 हेलीकॉप्टर एक तरफ जहाँ समुद्र से पानी ला-लाकर संयंत्र पर डाल रहे हैं, वहीं एक और हेलीकॉप्टर हवा में रेडियोधर्मिता के स्तर की जाँच कर रहा है। संयंत्र में तापमान बढ़ने से पानी भाप बनकर उड़ जाएगा, जिससे इस्तेमालशुदा परमाणु ईंधन छड़े गर्म होकर वातावरण में हानिकारक रेडियोधर्मी सामग्री छोड़ सकती हैं।
गुरुवार को मुख्य कोशिश रिएक्टर संख्या तीन और चार स्थित स्टोरेज पुल को ठंडा करने की थी क्योंकि इनकी कूलिंग प्रणाली काम नहीं कर रही थी। इसके चलते इस बात की आशंका उत्पन्न हो गई थी कि परमाणु ईंधन की छड़ें पिघल सकती हैं और रेडियोधर्मिता का प्रसार संयंत्र के बाहर हो सकता है।

गत शुक्रवार को भूकंप और सुनामी के कारण फुकुशिमा परमाणु संयंत्र की छह रिएक्टरों में से चार रिएक्टर प्रभावित हुए हैं। संयंत्र से हटने से पहले हेलीकाप्टरों ने चार बार पानी डाला। बुधवार को उच्च विकिरण स्तर के कारण रिएक्टरों को ठंडा करने के कार्य में लगे हेलीकाप्टरों को हटाना पड़ा था।
रक्षा मंत्री तोशिमी कित्जावा ने टोक्यो में बताया कि हेलीकाप्टरों ने आज साढ़े सात सौ लीटर की क्षमता वाले बैगों में समुद्र का पानी भरकर संयंत्रों पर डाला। दूसरी तरफ संयंत्र पर पानी डालने के इस काम में सैन्य ट्रकों का भी इस्तेमाल किया गया लेकिन उच्च विकिरण स्तर के कारण इसे बाद में स्थगित कर दिया गया।

क्योदो समाचार एजेंसी ने सरकार की परमाणु और औद्योगिक सुरक्षा संस्था के हवाले से कहा है कि पूरे खतरे को देखते हुए पहली प्राथमिकता रिएक्टर संख्या तीन और चार स्थित पुलों में पानी डालने की होनी चाहिए क्योंकि ये पुल खौल रहे हैं और इनके उपर छत भी पूरी नहीं है जिससे रेडियोधर्मी रिसाव की आशंका बढ़ जाती है।
जापान सरकार ने लोगों को चेतावनी दी है कि तापमान गिरने के कारण बिजली की खपत बढ़ने के मद्देनजर वे विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहें। आपातकालीन उपायों के तहत रेलवे को शाम से रात तक की ट्रेन सेवाओं को कम करने को कहा गया है।

संवाद समिति ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि प्रभावित रिएक्टरों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के चलते उचाईं पर उड़ान भरने में सक्षम अमेरिकी सेना के विमान को लगाया गया है। यह विमान उस इमारत के अंदर की तस्वीरें लेगा जिसमें रिएक्टर नम्बर चार स्थित है।
परमाणु संयंत्र की संचालक कंपनी तोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक रिएक्टर नम्बर एक में करीब 70 प्रतिशत और रिएक्टर नम्बर दो में करीब 33 प्रतिशत परमाणु ईंधन छड़े क्षतिग्रस्त हो गई हैं। (भाषा)



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