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दुनिया का सबसे विशालकाय बरगद जो दिखता है जंगल जैसा

Updated: मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021 (14:28 IST)
सांकेतिक चित्र
वैसे तो दुनिया का सबसे विशालकाय वृक्ष है ब्राजील नट्स, जो ब्राजील में है और जिसने देखने के लिए दुनियाभार से लोग वहां जाते हैं परंतु यह बरगद नहीं है। दुनिया का सबसे विशालकाय बरगद का पेड़ भारत में है। आओ जानते हैं इस बरगद के बारे में रोचक जानकारी।
 
भारत में यूं तो बरगद के ऐसे भी पेड़ है जिनके हजारों वर्ष पुराने होने का दावा किया जाता है और साथ ही कई विशालकाय बरगद भी है लेकिन हम जिस बरगद की बात कर रहे हैं उसके सामने सभी छोटे हैं। इसे कहते हैं 'द ग्रेट बनियान ट्री'।
 
इस विशालकाय वृक्ष को पहली बार देखने से समझ में यह आता है कि यह कोई छोटासा जंगल है जिसमें हजारों एक जैसे वृक्ष उगे हुए हैं लेकिन गौर से देखने पर समझ में आता है कि यह तो एक ही वृक्ष है जिसकी जटाएं, जड़ और तने चारों और फैल गए हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ही है यह विश्व का सबसे बड़ा और विशालकाय बरगद का पेड़। हर साल देश-विदेश से हजारों टूरिस्ट इस बरगद को देखने के लिए आते हैं। यदि आप भी इसे देखना चाहते हैं तो चलिये जान लेते हैं कि यह वृक्ष कहां पर है।
 
यह बरगद का पेड़ कोलकाता के आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन में है। साल 1787 में जब इस बॉटनिकल गार्डेन को स्थापित किया गया, उस समय इस बरगद की उम्र 15 से साल 20 साल थी। इस लिहाज से आज इस बरगद की उम्र लगभग 254 साल हो चली होगी। इस बरगद को दूर से देखें तो ये एक जंगल की तरह नजर आता हैं। दरअसल, बरगद के पेड़ की शाखाओं से निकली जटाएं पानी की तलाश में नीचे जमीन की और बढ़ती गईं, जो बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगीं।
 
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये बरगद दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ है, जो लगभग 14,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इस बरगद की 3,372 से अधिक जटाएं जड़ का रूप ले चुकी हैं। सबसे सुखद यह कि यह बरगद पक्षियों की 87 अलग-अलग प्रजातियां का सुकून भरा घर भी है। मूल तने की परिधि जमीन से 1.7 मीटर की ऊंचाई पर 16.5 मीटर थी। वर्तमान में यह लगभग 18.918 वर्ग मीट के क्षेत्र में फैला है। वृक्ष की परिधि लगभग 486 मीटर है। इसकी सबसे ऊंची शाखा 24 मीटर लंबी है। वर्तमान में जमीन तक पहुंचने वाली स्तंभ जड़ों की कुल संख्या 3,772 है।
 
साल 1884 और 1987 में आए 2 चक्रवाती तुफानों ने इस बरगद को काफी नुकसान पहुंचाया था। साल 1925 में इस विशाल बरगद की मुख्य शाखा में फंगस लग गया, जिसके बाद मुख्य शाखा को काटना पड़ा, लेकिन इतना कुछ झेलने के बाद भी ये बरगद आज शान से अपनी जगह पर अडिग और अटल खड़ा है। 19वीं शताब्दी की कुछ यात्रा वृत्तातों में इसका उल्लेख अवश्य मिलता है।
 
इसकी विशलता को देखते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज है। इस विशाल बरगद के सम्मान में भारत सरकार ने साल 1987 में डाक टिकट जारी किया था और यह बरगद बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया का प्रतीक चिन्ह भी है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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