Hanuman Chalisa

वीर शिवाजी के तीन प्रेरक किस्से

Updated: बुधवार, 18 फ़रवरी 2015 (16:05 IST)
निडर शिवाजी 
 


 
शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी था। वह अक्सर युद्ध लड़ने के लिए घर से दूर रहते थे। इसलिए उन्हें शिवाजी के निडर और पराक्रमी होने का अधिक ज्ञान नहीं था।
 
किसी अवसर पर वे शिवाजी को बीजापुर के सुलतान के दरबार में ले गए। शाहजी ने तीन बार झुक कर सुलतान को सलाम किया, और शिवाजी से भी ऐसा ही करने को कहा। लेकिन, शिवाजी अपना सिर ऊपर उठाए सीधे खड़े रहे।
 
एक विदेशी शासक के सामने वह किसी भी कीमत पर सिर झुकाने को तैयार नहीं हुए। इतना ही नहीं किसी शेर की तरह शान से चलते हुए दरबार से वापस चले गए। इसीलिए छत्रपति शिवाजी महाराज को एक कुशल और प्रबुद्ध सम्राट के रूप में जाना जाता है।
 
*********
 
 

शिवाजी का साहस



 
 
एक बार की बात है। शिवाजी के समक्ष उनके सैनिक किसी गांव के मुखिया को पकड़ कर लाए। मुखिया बड़ी और घनी-घनी मूछों वाला बड़ा ही रसूखदार व्यक्ति था। लेकिन आज उस पर एक विधवा की इज्जत लूटने का आरोप साबित हो चुका था।
 
यह वाकया उस समय का है, जब शिवाजी मात्र चौदह साल के थे। शिवाजी बड़े ही बहादुर, निडर और न्यायप्रिय थे और खास तौर पर उनके मन में महिलाओं के प्रति असीम सम्मान था।
 
उन्होंने तत्काल अपना निर्णय सुनाया और कहा- 'इसके दोनों हाथ और पैर काट दो,' ऐसे जघन्य अपराध के लिए इससे कम कोई सजा नहीं हो सकती।
 
छत्रपति शिवाजी महाराज जीवनपर्यंत साहसिक कार्य करते रहे और हमेशा गरीब, बेसहारा लोगों को प्रेम और सम्मान देते रहें। ऐसे थे छत्रपति वीर शिवाजी महाराज। 
 
******** 
 

चीते को मार गिराया


 
एक प्रसिद्ध किस्सा है, शिवाजी महाराज के साहस का। यह उस समय की बात है, जब पुणे के करीब नचनी गांव में एक भयानक चीते का आतंक छाया हुआ था।
 
वह चीता अचानक ही कहीं से हमला करता था और जंगल में ओझल हो जाता।
 
सभी डरे हुए गांव वाले अपनी समस्या लेकर शिवाजी के पास पहुंचे और विनती करते हुए कहा- हमें उस भयानक चीते से बचाइए, महाराज। वह अबतक ना जाने कितने बच्चों को मार चुका है। ज्यादातर वह चीता तब हमला करता है, जब हम सब सो रहे होते हैं।
 
महाराज शिवाजी ने धैर्यपूर्वक ग्रामीणों की समस्या सुनी और उन्हें ढाढ़स बंधाते हुए कहा- आप लोग निश्चिंत रहे, किसी बात की चिंता मत करिए, मैं यहां आपकी मदद करने के लिए ही हूं।
 
फिर शिवाजी अपने सिपाहियों यसजी और कुछ सैनिकों के साथ जंगल में चीते को मारने के लिए निकल पड़े। बहुत ढूंढ़ने के बाद जैसे ही चीता सामने आया, सैनिक डर के मारे पीछे हट गए पर शिवाजी और यसजी बिना डरे ही ‍चीते पर टूट पड़े और पलक झपकते ही उस मार गिराया। 
 
गांव वालों ने खुश होकर 'जय शिवाजी' के नारे लगाएं। 

ऐसी और खबरें तुरंत पाने के लिए वेबदुनिया को फेसबुक https://www.facebook.com/webduniahindi पर लाइक और 
ट्विटर https://twitter.com/WebduniaHindi पर फॉलो करें।


 

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

क्या रूस में मोजतबा खामेनेई प्लास्टिक सर्जरी करवा रहे है, अयातुल्ला की अंतिम विदाई से रहस्यमयी अनुपस्थिति से उठे सवाल?

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका