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छावनी की बर्बादी का तमाशा देखने वालों, आपका स्वागत है, आज हमारी, कल तुम्हारी बारी है
Chhawani indore
दुकानें टूटी बिखरी हैं, मकां जमींदोज़ हैं सारे
सियासत की हुकूमत में उजड़े हैं ये घर सारे
इंदौर के छावनी इलाके में उजडे हुए घरों का मलबा और टूटी हुई दीवारें कुछ यही कहते हुए सुनाई दे रहे हैं दरअसल, इंदौर के छावनी (Chhawani) इलाके में उजड़े हुए घर और दुकानें नगर निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण के लिए किए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान का परिणाम है। मधुमिलन से छावनी तक के 60-70 फीट मार्ग के निर्माण के लिए लगभग 120-150 पुराने मकानों और दुकानों को तोड़ा गया है, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं।
मधुमिलन चौराहे से छावनी होकर जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने के लिए प्रशासन ने बुलडोजर और पोकलेन मशीनों की मदद से यह कार्रवाई की। बता दें कि छावनी इंदौर का एक बेहद पुराना और ऐतिहासिक क्षेत्र है। यहां के कुछ मकान 100 से 150 साल पुराने थे, जिन्हें तोड़े जाने से स्थानीय लोगों की पीढ़ियों पुरानी यादें मलबे में बदल गई हैं। प्रभावित लोगों के सामने रहने और आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बता दें कि कई घरों को बिना अनुमति के ही तोड़ दिया गया है। कई लोग अपने घरों को मलबे में तब्दील होते देखकर दुखी हैं। छावनी में कई जगह इंदौर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ तख्तियां लगाई गई हैं, जिन पर लिखा गया है।
हमें जीवित छोड़ देने के लिए नगर निगम प्रशासन का धन्यवाद।
1. कार्रवाई का कारण
यह तोड़फोड़ इंदौर के मास्टर प्लान के तहत मधुमिलन चौराहा से लेकर छावनी और जगन्नाथ धर्मशाला तक की सड़क को चौड़ा करने के लिए की गई है। इस मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए बाधा बन रहे निर्माणों को हटाया गया है।
2. कितनी तोड़फोड़ हुई?
नगर निगम ने लगभग 17 पोकलेन और जेसीबी मशीनों और 150 से अधिक कर्मचारियों की मदद से करीब 120 से 124 मकानों और दुकानों के बाधक हिस्सों को ढहा दिया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
सड़क की चौड़ाई: पहले इस सड़क को 80 फीट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों के भारी विरोध के बाद प्रशासन ने इसे 60 फीट चौड़ा करने का फैसला किया (यानी दोनों तरफ से 20 फीट की राहत दी गई)। जिन भवनों पर कोर्ट का स्टे था, उन्हें फिलहाल छोड़ दिया गया है।
3. जनता में भारी आक्रोश और आरोप
इस कार्रवाई के बाद छावनी इलाके में रहने वाले परिवारों और व्यापारियों में जबरदस्त नाराजगी है। उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
सामान निकालने का समय नहीं मिला: प्रभावित लोगों का आरोप है कि नगर निगम ने बहुत जल्दबाजी में कार्रवाई की। उन्हें अपने घरों से कीमती और जरूरी सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
निशान से ज़्यादा तोड़फोड़: रहवासियों का कहना है कि जितने हिस्से पर लाल निशान लगाए गए थे, मशीनों ने तानाशाहीपूर्ण तरीके से उससे कहीं अंदर तक घुसकर घरों को जमींदोज कर दिया, जिससे पूरी इमारतें कमजोर हो गईं।
मुआवजे का मुद्दा: लोगों की करोड़ों रुपये की बहुमूल्य निजी जमीन इस चौड़ीकरण में चली गई, लेकिन मुआवजे के बदले उन्हें केवल TDR (Transferable Development Rights) पॉलिसी थमाई जा रही है, जिसे लेकर वे असंतुष्ट हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal
