CBSE OSM controversy: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई (CBSE) के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ियों और मूल्यांकन में विसंगतियों को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बीच खुद आगे आकर इसकी नैतिक जिम्मेदारी ली है। सीबीएसई मुख्यालय में अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
OSM के अलावा NEET पेपर लीक मामला भी सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर विद्यार्थियों और उनके परिजनों में केन्द्र सरकार को लेकर काफी नाराजगी है। चूंकि शिक्षा मंत्रालय से जुड़े कई अन्य विवाद भी उनके कार्यकाल में सामने आए हैं। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि जून में होने वाले केन्द्रीय मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में उन्हें पद से भी हटाया जा सकता है।
प्रधान ने कहा कि छात्रों को जिस भी समस्या का सामना करना पड़ा है, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं। इसका समाधान निकाला जाएगा और व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यदि जांच में कोई भी गड़बड़ी या लापरवाही जानबूझकर की गई पाई जाती है, तो चाहे वह सीबीएसई के भीतर का हो या बाहर का, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था का बचाव
केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस नई डिजिटल प्रणाली का बचाव करते हुए इसे 'प्रोग्रेसिव इंस्ट्रूमेंट' यानी प्रगतिशील कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में 17 लाख छात्र शामिल हुए थे। कुल मिलाकर 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। प्रत्येक कॉपी में औसतन 40 पृष्ठ होते हैं, जिसके चलते लगभग 40 करोड़ पेजों को स्कैन किया गया। उन्होंने कहा कि चूंकि सीबीएसई ने पहली बार इस डिजिटल मार्किंग सिस्टम का इतने बड़े स्तर पर उपयोग किया था, इसलिए कुछ विसंगतियां और तकनीकी खामियां सामने आईं, जिन्हें दूर किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े विवाद
NTA की साख पर सवाल : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा और प्रबंधन में भारी चूक उजागर हुई, जिसे रोकने और सुधारने में मंत्रालय पूरी तरह विफल नजर आया।
CBSE OSM में गड़बड़ियां : उनके कार्यकाल में सीबीएसई की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के मूल्यांकन के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम लागू किया गया, जिसमें भारी गड़बड़ियां पाई गईं। छात्रों को धुंधली या अधूरी जांची गई आंसर-शीट मिलीं और पोर्टल के क्रैश होने व पेमेंट गेटवे फेल होने के कारण लाखों छात्रों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय कोर्ट की नाराजगी : हाल ही में कक्षा 8वीं की NCERT सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से जुड़े एक अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की। इसके बाद शिक्षा मंत्री को सार्वजनिक रूप से खेद जताना पड़ा और आनन-फानन में किताबें बाजार से वापस मंगवानी पड़ीं।
सीबीएसई कोर्स पर विवाद : इतिहास, विज्ञान और राजनीति विज्ञान की किताबों से डार्विन के सिद्धांत, मुगल काल और कुछ अन्य महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाने को लेकर सरकार पर 'इतिहास के राजनीतिकरण' और 'सिलेबस के भगवाकरण' के गंभीर आरोप लगे।
यूजीसी (UGC) नियमों को लेकर असंतोष : उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी द्वारा लाई गई नई नियमावलियों को लेकर देश के विभिन्न वर्गों में तीखा विरोध देखा गया। कुछ आलोचकों और छात्र समूहों का मानना था कि नए नियम व्यावहारिक रूप से असंतुलित हैं और इससे कैंपस में अंतर्विरोध व उत्पीड़न बढ़ सकता है। बाद में यह मामला कानूनी विवादों में भी फंसा। हालांकि इस विवाद का अभी कोई भी हल सामने नहीं आया है।
त्रिभाषा फॉर्मूला : नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत देश भर में त्रिभाषा फॉर्मूला लागू करने की घोषणा पर दक्षिण भारतीय राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु में भारी विरोध हुआ। वहां के क्षेत्रीय दलों ने इसे 'हिंदी थोपने की अप्रत्यक्ष कोशिश' करार दिया, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच भाषाई और शैक्षिक मोर्चे पर टकराव बढ़ा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala