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अयोध्या का मणि पर्वत, जानिए 5 खास पौराणिक बातें

गुरुवार,अगस्त 6, 2020
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अयोध्या में राम जन्मभूमि पूजन हेतु लगभग 100 से अधिक नदियों का जल और 2000 से अधिक स्थानों की मिट्टी को लाया गया। इसमें पीओके में स्थित पवित्र शारदा पीठ से भी प्रसाद और पवित्र मिट्टी को अयोध्या लाया गया था। कर्नाटक के रहने वाले और सेवा शारदा पीठ के ...
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मथुरा (उप्र)। देश-दुनिया में कोरोनावायरस संकट के कारण 'कृष्ण जन्माष्टमी' का पर्व इस साल पहले की तरह धूमधाम से नहीं मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 10 अगस्त की दोपहर से ही 13 अगस्त दोपहर बाद तक सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, लेकिन ...
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जैसे ही रोहिणी की गोद के बालक को देखा तो गर्गाचार्य मोहिनी मुरतिया में खो गए अपनी सारी सुधि भूल गए खुली आंखों से प्रेम समाधि लग गयी गर्गाचार्य ना बोलते थे ना हिलते थे ना जाने इसी तरह कितने पल निकल गए यह देख बाबा यशोदा घबरा गए हिलाकर पूछने लगे बाबा ...
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एक पौराणिक लोककथा के अनुसार एक लपसी था, एक तपसी था। तपसी हमेशा भगवान की तपस्या में लीन रहता था। लपसी रोजाना सवा सेर की लापसी बनाकर भगवान का भोग लगा कर जीम लेता था।
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राम जन्मभूमि आंदोलन में गूंजने वाला सबसे अहम नारा रहा- राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। 1990 के दौर में यह नारा देश के गांव गांव में गूंज गया था। बच्चा बच्चा ये नारा लगाता था। आखिर यह नारा किसने दिया था?
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अयोध्या की सरयू नदी के दाहिने तट पर ऊंचे टीले पर स्थित हनुमानगढ़ी सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। माना जाता है कि लंका विजय करने के बाद हनुमान यहां एक गुफा में रहते थे और राम जन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे। इसी कारण इसका नाम हनुमानगढ़ या ...
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त्रेता के ठाकुर अर्थात त्रेतायुग के भगवान राम का वह स्थान जहां पर उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था। इस यज्ञ स्थल पर एक भव्य मंदिर बना दिया गया है।
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5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजा और शिलान्यास करेंगे। मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या के लगभग 150 पौराणिक स्थानों का जीर्णोद्धार होने वाला है। इसी में से एक है सीता रसोई। आओ जानते हैं ...
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सप्तपुरियों में से एक सरयू तट पर बसी प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में राम के जीवन से जुड़े कई स्थान है एक ओर जहां उनकी पत्नी सीता का कनक भवन है तो दूसरी ओर उनके पिता का महल। उनके प्रिय हनुमान का हनुमानगढ़ी में स्थान है तो इसी तरह वह स्थान भी ...
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अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण 5 अगस्त 2020 से प्रारंभ हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। इस निर्माण के दौरान लगभ 150 से अधिक पौराणिक स्थानों का जीर्णोद्धार भी होना हैं जिसमें से एक दशरथ महल भी है। ...
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सरयू नदी के तट पर बसी सप्त पुरियों में से एक अयोध्या नगरी प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि है। सरयू तट पर कई प्राचीन घाट हैं। हर एक घाट से जुड़ी पौराणिक कथाएं हैं। इसी तरह से एक घाट ऐसा हैं जहां श्रीराम ने सरयू में उतरकर जल समाधी ले ली थी। आओ जानते हैं उस ...
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5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भूमि पूजा करने के बाद राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा इसी के साथ रामनगरी के लगभग 150 से अधिक जर्जर हो चुके पौराणिक मंदिरों का भी पुनरुद्घार होगा। उन्हीं में से एक है ...
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अयोध्या की सरयू नदी के दाहिने तट पर ऊंचे टीले पर स्थित हनुमानगढ़ी सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। अयोध्या में राम जन्मभूमि के दर्शन करने से पूर्व यहां पर हनुमानजी के ही दर्शन करना होते हैं। आओ जानते हैं इसका संक्षिप्त इतिहास।
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भगवान श्रीराम के मंत्रों का जाप करने से मनचाही कामना पूरी होती है। आइए, जानें सरल मंत्र...
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अयोध्या में राम जन्मभूमि पर सैंकड़ों वर्षों वर्षों बाद पुन: भव्य राम मंदिर बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त 2020 को इसका भूमि पूजन करेंगे। देशभर में श्री राम के कई प्रसिद्ध मंदिर है लेकिन आप शायद ही जानते होंगे कि प्रभु श्रीराम की ...
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श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के अनेक पहलू हैं। वे मां के सामने रूठने की लीलाएं करने वाले बालकृष्ण हैं, तो अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर कृष्ण। इस व्यक्तित्व का सर्वाधिक आकर्षक पहलू दूसरे के निर्णयों का सम्मान है। कृष्ण के मन में सबका सम्मान ...
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कर्ण ने कृष्ण से पूछा - मेरा जन्म होते ही मेरी माँ ने मुझे त्याग दिया। क्या अवैध संतान होना मेरा दोष था ? द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया।
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श्रावण मास में सोमवार को व्रत रखने का बहुत महत्व है। सावन का अंतिम सोमवार 3 अगस्त को हो। इस दिन लगभग सभी लोग उपवास रखेंगे। आओ जानते हैं कि इस बार का अंतिम सोमवार क्यों है महत्वपूर्ण।
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श्रावण में भगवान शिव अर्थात् भोलेनाथ भगवान की आराधना की जाती है। इसी के साथ ही श्रावण से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि तक भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कोटि यज्ञ का फल का फल देने वाली होती है।
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