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चाणक्य के अनुसार इन 2 लोगों से दूरी बनाए रखें वर्ना पछताएंगे

सोमवार,फ़रवरी 24, 2020
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भारत के एक महान संत एवं विचारक रहे स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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शबरी श्री राम की परम भक्त थीं। जिन्होंने राम को अपने झूठे बेर खिलाए थे। शबरी का असली नाम श्रमणा था। वह भील समुदाय के शबर जाति से संबंध रखती थीं। इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी पड़ा।
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यह कहानी महाराष्ट्र के महान संत ज्ञानेश्वर से जुड़ी हुई है। ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। 21 वर्ष की आयु में ही संसार का त्यागकर समाधि ग्रहण कर ली ...
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इस बार फाल्गुन कृष्ण अमावस्या 23 फरवरी 2020, रविवार को मनाई जा रही है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं।
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फाल्गुन मास चंद्र देव की आराधना के लिए सबसे सही और उपयुक्त समय होता है, क्योंकि यह चंद्रमा का जन्म माह माना जाता है।
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुरर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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संत गाडगे बाबा ने मानवता की भलाई के लिए कई संदेश दिए हैं। यहां पाठकों के लिए प्रस्त‍ुत हैं उनका दशसूत्री संदेश, जो हमें ईश्वर के करीब ले जाने की एक कड़ी है, आइए जानें
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राष्ट्रसंत गाडगे बाबा सच्चे निष्काम कर्मयोगी थे। उनका बचपन का नाम डेबूजी झिंगराजी जानोरकर था। गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र
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हर कोई शिव भक्त इस बात को जानना चाहता है कि आखिर भगवान शंकर का जन्म कैसा हुआ और इनके माता-पिता का क्या नाम है। अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव के जन्म और उनके माता-पिता के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं।
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उज्जैन। महाकालेश्वर में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व 21 व 22 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दौरान 44 घंटे मंदिर के पट खुले रहेंगे। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। गर्भगृह में पुजारियों का ही ...
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भगवान शिव की विश्व में कई विशालकाय प्रतिमाएं हैं, लेकिन नेपाल में जो मूर्ति स्थापित है उससे ऊंची मूर्ति के बारे में अभी तक अज्ञात है। इस मूर्ति को देखा अद्भुत है।
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यूं तो भगवान शिव के कई चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर है लेकिन हमने खोजें हैं इस महाशिवरात्रि पर आपके लिए 6 खास मंदिर। जानिए उनके बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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केरल में वैसे तो कई राम मंदिर हैं और कई थे। लेकिन वर्तमान में दो प्रमुख राम मंदिर है। पहला थालास्सेरी में और दूसरा त्रिसूर में। इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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साड़ी एक गई, मैं दूसरी बना दूंगा। पर तुम्हारी ज़िन्दगी एक बार अहंकार में नष्ट हो गई तो दूसरी कहां से लाओगे तुम? तुम्हारा पश्चाताप ही मेरे लिए बहुत कीमती है।
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पौराणिक शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। इस दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक आराधना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। आइए जानें कैसे करें पूजन :-
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शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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महर्षि दयानंद सरस्वती ऐसे पहले महामानव थे, जिन्होंने वेदों को सत्य विद्याओं की पुस्तक कहा ही नहीं सिद्ध भी किया। ईश्वर और उसका दिव्य ज्ञान वेद। ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत सर्वज्ञ ईश्वर का दिया
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एक छोटी-सी ज्ञान-गोष्ठी में स्वामी दयानंद के कुछ भक्त बैठे थे। उनमें से एक ने कहा- 'स्वामी जी, जो कुछ मैं पूछना चाहता हूं वह आपके निजी जीवन से संबंध रखता है, इसलिए पूछते हुए संकोच हो रहा है।'
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म मोरबी के पास काठियावाड़ क्षेत्र जिला राजकोट, गुजरात में 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। मूल नक्षत्र में जन्म होने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया ...
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