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Ganga Dussehra Katha 2020 : गंगा दशहरा के दिन अवश्य पढ़ें गंगा अवतरण की यह पौराणिक कथा

गुरुवार,मई 28, 2020
Ganga Dussehra Katha
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शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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जम्मू। इस बार की अमरनाथ यात्रा पर संशय गहराता जा रहा है। असमंजस में फंसे हुए अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने अब अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण को 31 मई तक स्थगित किया गया है। यात्रा इस बार 23 जून को शुरू होनी है।
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कान्हा जी की मुस्कान रोके नहीं रुक रही...अकेले ही महल की छत पर बैठे हुए कृष्ण... दूर आकाश में चाँद को निहारते जा रहे हैं...और मंद मंद मुस्कुराते जा रहे हैं...कान्हा बार बार पीछे मुड़ के देख भी लेते हैं की कोई उन्हें देख तो नहीं रहा.. और फिर अनायास ...
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वराह पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी, वह दस पापों को नष्ट करती है।
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पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि ‘हे देव ! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही? गंगा में डुबकी लगाने से क्या सच में धुलते हैं पाप?
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गंगा स्नान से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसी लोगों की मान्यता रहती है। गंगा में लगाई गई एक डुबकी ही श्रद्धालुओं को क्षणभर में पवित्र कर देती है, इसमें रत्तीभर भी संदेह नहीं है।
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ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन लिए हुए हो पर जिसकी जेब में ये बसते हैं वो ही इस दुनिया में सबसे रुतबेदार है। इसी के आस-पास सारी दुनिया घूमती है। फिर भी पैसा ...
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क्या दुर्लभ मनुष्य जन्म मिलना, यह भाग्य नहीं है? एक सुसंस्कृत देश की प्रजा के रूप में पहचाने जाना यह भाग्य नहीं है?
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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हर साल ज्येष्ठ माह में नौतपा होता है। इस साल 25 मई से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएगा। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून 2020 तक रहेगा।
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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड से कहा कि चारों हिमालय धामों के दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को गर्भगृह को छोड़कर बाकी मंदिर परिसर के ऑनलाइन दर्शन और ऑडियो के माध्यम से ...
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युद्ध के समय जब सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गईं ....तो अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए योगेश्वर श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया जो आज भी व्यवहारिक जीवन की समस्याओं के लिए समाधानकारक है।
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एक दिन श्री शनिजी को कड़ी भूख लगी और उन्होंने मां संवर्णा के पास खाने को कुछ मांगा, किंतु संवर्णा ने कहा कि 'भगवान को भोग चढ़ाने के बाद ही मैं तुझे खाने खिलाऊंगी।' शनिजी को क्रोध आया ...
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श्री शनिदेव की लोहा एवं पत्थरयुक्त दिखाई देने वाली, काले वर्ण वाली 5 फुट 9 इंच लंबी तथा 1 फुट 6 इंच चौड़ी मूर्ति जो आंगन में धूप, ठंडक तथा बरसात में रात-दिन खुले आकाश के नीचे है। इसके संदर्भ में स्थानीय बुजुर्गों से सुनने में मिला है कि लगभग 350 ...
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भारतीय संस्कृति में 'वट सावित्री अमावस्या एवं पूर्णिमा' का व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। वट पूजा से जुड़े धार्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलू में 'वट' और 'सावित्री' दोनों का विशिष्ट महत्व माना गया है।
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वैसे जो भारतभर में शनिदेव के कई पीठ है किंतु तीन ही प्राचीन और चमत्कारिक पीठ है, जिनका बहुत महत्व है। शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र), शनिश्चरा मन्दिर (ग्वालियर मध्यप्रदेश), सिद्ध शनिदेव (कशीवन, उत्तर प्रदेश)। इनमें से शनि शिंगणापुर को भगवान शनिदेव का ...
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भगवान शनिदेव की जन्म कथा हमें पुरणों में अलग अलग वर्णन के साथ मिलती है। शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या के दिन हुआ था। हालांकि कुछेक ग्रंथों में शनिदेव का जन्म भाद्रपद मास की शनि अमावस्या को माना गया है।
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सुहागिन महिलाओं द्वारा हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। वट वृक्ष का पूजन और सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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श्री शनिदेव अध्यात्म के मालिक हैं, किसी भी आराधना, साधना, सिद्धि हेतु शनिदेव की उपासना परमावश्यक है।
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