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जयंती विशेष: दाउदी बोहरा समुदाय के शांतिदूत डॉ. सैयदना साहब का जीवन परिचय

Updated: बुधवार, 24 नवंबर 2021 (17:10 IST)
Syedna Burhanuddin
 
दाउदी बोहरा समुदाय (Spiritual Leader) इस्लाम धर्म के शिया इस्माइली शाखा का ही एक धार्मिक संप्रदाय है और इसी समुदाय के धर्मगुरुओं के 51वें धर्मगुरु सैयदना ताहेर सैफुद्दीन साहब के घर सन् 1915 में एक तेजस्वी बालक ने जन्म लिया था, जिन्हें सभी भारतवासी डॉ. सैयदना साहब के नाम से जानते है। वे दाउदी बोहरा समाज के 52वें धर्मगुरु है। उनका पूरा नाम सैयदना डॉ. अबुल काईद जौहर मोहम्मद बुरहानुद्दीन है। 
 
दुनिया भर में फैले दाऊदी बोहरा समाज के प्रमुख धर्मगुरु डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन (Dr. Syedna Mohammad Saheb) का जन्म सूरत में हुआ था। डॉ. सैयदना के जन्म पर उनके वालिद साहब हिज होलीनेस डॉ. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने फरमाया था कि उनका बेटा फातेमी दावत (इमाम का वह मिशन जो अल-दई-अल मुतलक द्वारा चलाया जाता है) के सम्मान तथा प्रतिष्ठा का अग्रदूत होगा। 
 
डॉ. सैयदना अधिकांश समय पिता के साथ रहे और उनसे ज्ञानार्जन करते रहे। मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अपने वालिद की देखरेख में ली गई तालीम के परिणाम स्वरूप पूरी की पूरी कुरान-ए-मजीद को याद कर लिया था। मात्र 19 वर्ष की आयु में 51वें दई-अल-मुतलक सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने सैयदना को अल-दई-अल-मुतलक का वारिस मुकर्रर कर दिया था। 
 
सैयदना साहब ने हजारों बोहराओं की नगरी तथा चार सदियों से दावत की गद्दी यमन की यात्रा की, जिसके परिणामस्वरूप यमन सरकार और वहां के लोगों ने बोहराओं को मान्यता प्रदान कर दी। इस महान उपलब्धि पर सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने अपने बेटे को 'मंसूर-उल-यमन' नामक ऐतिहासिक खिताब से नवाजा। यह खिताब इससे पहले एक मर्तबा बारह सदी पहले दिया गया था।
 
सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के इंतकाल होने पर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन अल-दाइल-अल मुतलक की गद्दी पर 52वें गद्दीनशीन जलवा अफरोज हुए। अपने पूर्वजों और वालिद की परंपरा को अपनाते हुए उन्होंने पहला रिसाला रमदानिया इस्तिफताहो जोबादिल मारिफ, जो कि अरब साहित्य की रचना है, लिखा। 1941 में सैयदना साहब को अल-अलीम-उर-रासिक का खिताब अता किया गया। साथ ही एक वर्ष बाद ही सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने उन्हें उमादातुल उलमा एल मुवाहेदीन का खिताब अता किया गया। यह दुर्लभ सम्मान है, जो बोहरा समुदाय के सबसे ज्यादा विद्वान इंसान को ही दिया जाता है।
 
 
दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी और सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण केन्द्र अल-अजहर यूनिवर्सिटी ऑफ कैरो, इजिप्ट ने सैयदना साहब को उनके सम्मानजनक कार्य के लिए डॉक्टर ऑफ इस्लामिक स्टडीज की उपाधि प्रदान की थी। 
 
सैयदना साहब के व्यापक तथा उदारवादी मानवीय कार्यों के प्रति समस्त बोहरा समुदाय नतमस्तक हैं और हमेशा रहेगा। डॉ. सैयदना साहब श्रेष्ठतम मानवतावादी, शिक्षाविद और भलाई के अग्रदूत थे। डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब मानवता की मिसाल थे। उन्होंने बोहरा समाज को एक नई दिशा दी। दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेता डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन Dr. Syedna Mohammad Saheb का निधन दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से 17 जनवरी 2014 को 98 वर्ष की आयु में हुआ था। ग्रेगोरी कालदर्शक के अनुसार उनकी उम्र 102 साल थी। 
 
सैयदना साहब ने सिखाया है कि न कोई बड़ा है और न कोई छोटा बल्कि सब एक समान हैं। वे कहते थे कि सबका भला करो, गुस्सा मत करो, मीठा बोलो। उनका बताया रास्ता ही मानवता का रास्ता है। 

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