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महाभारत में रामायण की रामकथा

मंगलवार,अप्रैल 13, 2021
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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल से प्रारंभ हो चुकी जो 22 अप्रैल तक रहेगी। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहें हैं तो आपको 9 खास बातों का जान लेना चाहिए।
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सिंध प्रांत के हिन्दुओं में झूलेलाल को पूजने पूजने की बहुत मान्यता है। सिंध प्रांत के हिन्दुओं को सिंधी कहा जाता है। झूलेलाल की जयंती चैत्र शुक्ल माह की द्वितीया को आती है। भगवान झूलेलाल हिन्दूदेव वरुणदेव के अवतार माने जाते हैं।
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देवी ब्रह्मचारिणी की की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है
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मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
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13 अप्रैल को वर्ष प्रतिपदा है। इस दिन यानी आगामी नववर्ष पर आप भी अपने गृहनिवास/ प्रतिष्ठान पर ध्वज पूजन अवश्य करें-
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नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के नाम, पढ़ें उनकी पावन आरती-
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आपका घर और दुकान कितना ही सुंदर क्यों नहीं बना हो लेकिन वास्तु दोष होने से सुख और समृद्धि नहीं होती है। इसलिए दुकान में वास्तु का जरूर ध्यान रखना चाहिए।
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सूर्य-चन्द्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं। योग 27 प्रकार के होते हैं। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमश: इस प्रकार हैं- 1.विष्कुम्भ, 2.प्रीति, 3.आयुष्मान, 4.सौभाग्य, 5.शोभन, 6.अतिगण्ड, 7.सुकर्मा, 8.धृति, 9.शूल, ...
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सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने को संक्रांति कहते हैं। सूर्य प्रत्येक माह दूसरी राशि में गोचर करता है। इस तरह वर्ष में 12 संक्रातियां होती हैं। सूर्य मेष राशि से अंतिम राशि मीन तक भ्रमण करता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश को मेष ...
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Hanuman Jayanti 2021: जयंती अर्थात जिस दिन उनका जन्म हुआ था। हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्‍ण ...
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देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना।
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जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
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इस साल शक्ति की उपासना का ये पर्व यानी चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 से शुरू हैं। 21 अप्रैल तक ये पर्व चलेगा। नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष-2021 की शुरुआत भी होगी। इस बार का महिसासुर मर्दिनी का आगमन दुराचारी,राक्षसी प्रवृत्ति के ...
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हरिद्वार। महाकुंभ 2021 में सोमवार को सोमवती अमावस्या के दिन सरकार के घोषित कुंभकाल के पहले शाही स्नान पर अलसुबह से ही हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी थी। सुबह 7 बजे तक हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर भी ...
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जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
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इस माह की दिनांक 13 अप्रैल, दिन मंगलवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है ...
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चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से नवरात्रि और नववर्ष का पर्व प्रारंभ हो रहा है। 13 अप्रैल 2021, मंगलवार को मातारानी अश्व पर सवार होकर आ रही हैं। पंचांग के अनुसार कोई तिथि क्षय नहीं होगी। ऐसे में इस बार नवरात्रि के पूरे 9 दिन ही रहेंगे। ...
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आपकी सभी संतान व सभी भक्त सुखी हों। इसी कामना से मैं इस नवरात्रि में आपकी आराधना कर रहा हूं। हे मां! हमको इस महामारी की घोर विपदा से बचा हमारे कष्टों का हरण कर। इसी मनोरथ से आराधना कर मां के घट की स्थापना करें।
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नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को घट या कलश स्थापना से की जानी चाहिए। कलश को गंगा जल से भरना चाहिए और उसमें पंच रत्न और पंच पल्लव (आम के पत्ते) डालने चाहिए। पहले दिन उत्तम विधि से किया हुआ पूजन मनुष्यों की अभिलाषा पूर्ण करने वाला होता है।
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