dharma sangrah

बौनों की दुनिया

Updated: बुधवार, 9 जुलाई 2014 (21:07 IST)
WDWD

1) भ्रष्टाचार के पेड़ पर
फरेब के पंछी की तरह
पली-बढ़ी है ये दुनिया ।
गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास की आग में
हर दिन जली है ये दुनिया।
फिर भी सीना ताने कहती है ये दुनिया
दूसरों से कम दिलजली है ये दुनिया ।
बौने से लोग...

2) पश्चिम के रंगों में
रंगी है ये दुनिया।
तिरंगे की अर्थी पर
फूलों सी सजी है ये दुनिया।
हर दिन आसमाँ की ओर
तकती है ये दुनिया।
पर हकीकत में ज़मीं से ही
उठ नहीं सकती है ये दुनिया।
बौने से लोग..

3) आतंकी हमलों के भय से
सिमट जाती है ये दुनिया।
पर टीका-टिप्पणी और आलोचना में
खूब नाम कमाती है ये दुनिया।
दिन को बिलों में दुबककर
सोती है ये दुनिया।
रात को खूब हो-हल्ला मचाकर
रोती है ये दुनिया।
बौने से लोग....

4) परायों को जो
समझती है अपने।
अँधेरी रात में सजाती है जो
सुनहरे भविष्य के सपने।
जो भेद नहीं कर पाती
अपनों और परायों में।
दिन-रात खोई रहती है जो
अँधेरी रूह के सायों में ।
बौने से लोग...

लेखक के बारे में
गायत्री शर्मा
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

मध्य प्रदेश में पुनर्जीवित हो रही गुरुकुल की सनातन परंपरा

बाघ संरक्षण और पर्यावरण संतुलन

Guru Purnima Essay: हिन्दी निबंध: गुरु पूर्णिमा: गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का महापर्व

Shravan Month Essay: श्रावण मास पर रोचक हिन्दी निबंध

Happy Guru Purnima Messages: गुरु पूर्णिमा के 10 सबसे खास, भावात्मक और आकर्षक शुभकामना संदेश