Hanuman Chalisa

सरफरोशी की तमन्‍ना

Written By WD
Updated: शनिवार, 11 अगस्त 2007 (22:26 IST)
- रामप्रसाद ‘बिस्मिल्‍ ल ’

सरफरोशी की तमन्‍ना अब हमारे दिल में है,
NDND

देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है ।
रहबरे राहे मुहब्‍बत रह न जाना राह में,
लज्‍जते सेहरा नवरदी दूरी-ए-मंजिल में है ।
वक्‍त आने पर बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ,
हम अभी से क्‍या बताएँ क्‍या हमारे दिल में है ।
आज फिर मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार,
क्‍या तमन्‍ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे मुल्‍को मिल्‍लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्‍मत का चर्चा गैर की महफिल में है ।

अब न पिछले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़,
एक मिट जाने की हसरत बस दिल-ए-‘बिस्मिल्‍ ल ’ में है।

Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल

मैं गीत बन अधरों पर आऊंगा

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध