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अगस्त माह की 2 एकादशी कौन सी हैं, जानिए महत्व

बुधवार,जुलाई 28, 2021
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वर्ष 2021 में 11 से 18 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों तक माता भगवती को अपराजिता का फूल अर्पित कर बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।
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हमारे सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रानुसार हर हिन्दू धर्मावलंबी के लिए एकादशी व्रत रखना श्रेयस्कर माना गया है वहीं वैष्णवों के लिए तो एकादशी व्रत अनिवार्य बताया गया है।
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नदी में सिक्के डालने की परंपरा सालों से चली आ रही है। आखिर हम नदी में सिक्का क्यों डालते हैं? आइए जानते हैं 10 अन्य हिन्दू परंपराएं....
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शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत की सबसे खास बात यह है कि साल भर में आने वाली सभी एकादशियां का फल केवल इस व्रत को रखने से मिल जाता है। निर्जला, जैसा नाम से ही स्पष्ट है कि इस दिन जल ग्रहण न कर जल का संग्रहण किया जाता है।
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पंचांग के अनुसार गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा। 20 जून, रविवार को गंगा दशहरा यानी गंगा दशमी है।
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देवी! सुरेश्वरी भगवती गंगे इस गंगा स्तोत्र भक्तिभावपूर्वक का पाठ करने से सभी तरह के पाप, शाप, ताप नष्ट हो जाते हैं, बुद्धि विमल हो जाती है
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कलश विश्व ब्रह्मांड, विराट ब्रह्मा एवं भू-पिंड यानी ग्लोब का प्रतीक माना गया है। इसमें सम्पूर्ण देवता समाए हुए हैं। पूजन के दौरान कलश को देवी-देवता की शक्ति, तीर्थस्थान आदि का प्रतीक मानकर स्थापित किया जाता है।
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मंगलवार को हनुमान जी का वार माना जाता है। यही मंगल तब और अधिक विशेष हो जाता है जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है। 15 जून यानी आज ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल है।
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विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है। आज भी यदि इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई
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पौराणिक शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि का बहुत अधिक महत्व माना गया है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान श्री विष्णु के नौवें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।
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नित्य प्रातः तांबे के लोटे में शुद्ध जल भर लें। फिर सूर्य देवता के सम्मुख खड़े होकर दोनों हाथों से लोटे को ऊंचा उठाकर अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य के जल में (विशेष रूप से रविवार को)
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार केवट भोईवंश का था तथा मल्लाह का काम करता था। केवट रामायण का एक खास पात्र है, जिसने प्रभु श्री राम को
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अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य जैसे-विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार अथवा उद्योग का आरंभ करना अति शुभ फलदायक होता है। सही मायने में अक्षय तृतीया
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इस साल शुक्रवार, 14 मई 2021 को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जा रहा है। इस तिथि का जहां धार्मिक महत्व है वहीं यह तिथि व्यापारिक रौनक बढ़ाने वाली भी मानी गई है
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भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका राधा का जिक्र विष्णु, पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। मान्यता और किवदंतियों के आधार राधा के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। आओ जानते हैं कुछ अनसुनी बातें।
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कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन। जैसे होगा मन वैसे होगा विचार और भाव। जैसा होगा विचार और भाव वैसा ही होगा आपका व्यवहार और भविष्य। इसीलिए हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताए गए हैं। सात्विक भोजन, राजसिक भोजन और तामसिक भोजन। यहां ...
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भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा के अलग अलग समय नियुक्त हैं। यदि सही समय में सावधानी एवं नियम का पालन करके विष्णु की पूजा या आराधना की जाए तो उसका तुरंत ही असर होता है। यदि आप पूजा नहीं करते हैं तो कम से कम इन दिनों में आपको पवित्र बने रहना आवश्यक ...
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जिसने इस मृत्यु लोक में जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन तो मरना ही होगा। लेकिन यह सब जानते हुए भी वह इस तथ्य को स्वीकार नहीं करना चाहता। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के हाथ की रेखाएं भी मृत्यु के बारे में बहुत कुछ कहती हैं
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इस वर्ष रंगभरी एकादशी 25 मार्च 2021, गुरुवार को है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है, हालांकि इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं।
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