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इन 10 उपायों से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, देंगी अपार धन प्राप्ति का वरदान

गुरुवार,जनवरी 28, 2021
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पौष के महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। यह महीना सूर्य देव की पूजा के लिए विशेष महत्‍व रखता है। पौष पूर्णिमा इस मास का बहुत ही पावन दिन माना जाता है।
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घर में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा व अतृप्त आत्माएं निकल जाती हैं। जानिए शंख के उपयोग से क्या-क्या फायदे होते हैं
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हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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मुंडन संस्कार के बारे में मान्यता है कि इससे शिशु का मस्तिष्क और बुद्धि दोनों ही पुष्ट होते हैं।
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भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता तथा वैभवलक्ष्मी देवी का भी पूजन किया जाता है। तीनों व्रतों की विधियां अलग-अलग हैं।
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इस वर्ष पौष मास 31 दिसंबर 2020 से शुरू होकर 28 जनवरी 2021 तक जारी रहेगा। मान्यता है कि इस महीने में सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करने से ऊर्जा, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
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भगवान भैरव को एक रहस्यमी देवता माना जाता है। मुख्‍यत: तीन भैरवों की पूजा का प्रचलन है, एक काल भैरव, दूसरे बटुक भैरव और तीसरे आनंद भैरव। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक ...
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भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव 29 दिसंबर को मनाया जाएगा। वे त्रिदेवों के शक्तिपुंज हैं। भगवान के प्रत्येक अवतार का एक विशिष्ट प्रयोजन होता है।
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महागुरु दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु, महेश के शक्तिपुंज हैं। वस्तुतः भगवान के प्रत्येक अवतार का एक विशिष्ट प्रायोजन होता है। महागुरु दत्तात्रेय के अवतार में हमें असाधारण वैशिष्ट्य का दर्शन होता है।
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भगवान सूर्य देव के 21 नाम अतिशय पवित्र माने गए हैं। इन सूर्य नामों का सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पाठ करने से मनुष्य निरोगी बनता है। भगवान सूर्य के 21 नामों का पाठ करने से मनुष्य को
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रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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30 नवंबर को साल 2020 का अंतिम 'चंद्र ग्रहण' है, यह एक 'उपच्छाया चंद्र ग्रहण' है, जो कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, प्रशांत महासागर क्षेत्र और एशिया के हिस्सों दिखाई देगा।
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वर्ष 2020 में ऐसा ही संयोग बनने जा रहा है जब देवउठनी के बाद लगभग 3 माह तक विवाह मुहूर्त नहीं बनेंगे।
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गोपाष्टमी पर शुभ व ब्रह्म मुहूर्त में गाय और उसके बछड़े को नहला धुलाकर श्रृंगार किया जाता है।
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दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। अन्नकूट/गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है। इस दिन मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य सामग्रियों से ...
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दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा और उसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का त्योहार होता है। भाई दूज का त्योहार यमराज के कारण हुआ था, इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। कहते हैं कि इसी दिन ...
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वेबदुनिया के पाठकों के लाभार्थ यहां लक्ष्मी प्राप्ति हेतु दुर्लभ 'अष्टलक्ष्मी स्तोत्र' दिया जा रहा है। इसके नित्य श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनुष्य को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
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विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है। आज भी यदि इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई
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नदी में सिक्के डालने की परंपरा सालों से चली आ रही है। आखिर हम नदी में सिक्का क्यों डालते हैं? आइए जानते हैं 10 अन्य हिन्दू परंपराएं....
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